Dashmularishta Details and Uses

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दशमूलारिष्ट आयुर्वेद की एक बहुत ही जानी-मानी दवा है। इसमें दशमूल (Dasmoola), के साथ अन्य बहुत सी जड़ी बूटियों का संयोजन है। इस दवा का प्रयोग एक टॉनिक के रूप में तथा बहुत से रोगों के उपचार में किया जाता है। यह दवा विशेष रूप से वात रोगों और कफ रोगों की एक दिव्य दवा है।

वात रोग, वे रोग हैं जो की वात दोष के कारण होते हैं जैसे की जोड़ों का दर्द, गठिया, सूजन, ऐंठन, हिचकी, पीठ की जकड़न, थकावट, रुक्षता, आदि। दशमूलारिष्ट सब प्रकार की वात व्याधियों में लाभकारी है। कफजन्य रोग, वे रोग होते हैं जिनके होने का कारण कफ होता है जैसे की बुखार, खांसी, गैस, उलटी, भूख की कमी, भारीपन, जोड़ों की कमजोरी, अधिक बलगम आदि।

दशमूलारिष्ट स्त्री रोगों में बहुत लाभप्रद मानी गयी है। इसके अतिरिक्त यह पाचन सम्बन्धी रोग जैसे की भूख न लगना, उल्टी, संग्रहणी, पाचन की कमजोरी, अर्श आदि में लाभप्रद है। इस अरिष्ट के प्रयोग से मूत्र सम्बन्धी रोगों में लाभ होता है।

यह दवा केवल स्त्रियों के लिए ही नहीं है, अपितु इसे पुरुष भी ले सकते हैं। 

नीचे इस दवा के उपयोग, घटक, गुण, सेवनविधि, और मात्रा के बारे में जानकारी दी गयी है। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवा
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आयुर्वेदिक आसव-अरिष्ट
  • मुख्य उपयोग: वात रोग, प्रमेह रोग, उदर रोग और स्त्री रोग
  • मुख्य गुण: वात तथा कफ दोष को संतुलित करना
  • दवा का अनुपान: गुनगुना जल

पर्याय:

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Also known as/spelled as

  1. Dashmularishtam
  2. Dashmularisht
  3. Dasamoolarishtam
  4. Dashmoolarishta

Dashmularishtam is a tonic made from different herbs. This syrup promotes vitality and strength. It improves milk production in women’s and very useful to regularize periods. This is also very useful in menopause. It helps in removing toxins from body, controls pitta and vata, nourishes body tissues. Maintains healthy female reproductive system. Here information is given about complete list of ingredients, properties, uses and dosage of this medicine in Hindi language.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

दशमूलारिष्ट के घटक Ingredients of Dashmularishta

  1. बिल्व Aegle marmelos Root/Stem Bark 48 g
  2. श्योनाक Oroxylum indicum Root/Stem Bark 48 g
  3. गंभारी Gmelina arborea Root/Stem Bark 48 g
  4. पाटला Stereospermum suaveolens Root/Stem Bark 48 g
  5. अग्निमंथ Premna mucronata (Official substitute) Root/Stem Bark 48 g
  6. शालपर्णी Desmodium gangeticum Plant (Whole) 48 g
  7. प्रिश्पर्ण Uraria picta Plant (Whole) 48 g
  8. बृहती Solanum indicum Plant (Whole) 48 g
  9. कंटकारी Solanum xanthocarpum Plant (Whole) 48 g
  10. गोक्षुरु Tribulus terrestris Plant (Whole) 48 g
  11.  चित्रक Plumbago zeylanicum Root 240 g
  12. पुष्कर Inula racemosa Root 240 g
  13. लोध्र Symplocos racemosa Stem Bark 192 g
  14. गुडूची Tinospora cordifolia Stem 192 g
  15. आमला Emblica officinalis Pericarp 154 g
  16. जवासा Fagonia cretica Plant (Whole) 115 g
  17. खदिर Acacia catechu Heart Wood 77 g
  18. विजयसार Pterocarpus marsupium Heart Wood 77 g
  19. हरीतकी Terminalia chebula Pericarp 77g
  20. कूठ Saussurea lappa Root 19 g
  21. मजिष्ठ Rubia cordifolia Root 19 g
  22. देवदारु Cedrus deodara Heart Wood 19 g
  23. विडंग Embelia ribes Fruit 19 g
  24. मुलेठी Glycyrrhiza glabra Root 19 g
  25. भारंगी Clerodendrum serratum Root। 19 g
  26. कपित्थ Feronia limonia Fruit Pulp 19 g
  27. बहेड़ा Terminalia bellirica Pericarp 19 g
  28. पुनर्नवा Boerhavia diffusa Root 19 g
  29. चव्य Piper retrofractum Stem 19 g
  30. जटामांसी Nardostachys jatamansi Rhizome 19 g
  31. प्रियंगु Callicarpa macrophylla Flower 19 g
  32. सारिवा Hemidesmus indicus Root 19 g
  33. कृष्णा जीरक Carum carvi Fruit 19 g
  34. निशोथ Operculina turpethum Root 19 g
  35. रेणुका Vitex negundo Seed 19 g
  36. रसना Pluchea lanceolata Leaf 19 g
  37. पिप्पली Piper longum Fruit 19 g
  38. पुगा Areca catechu Seed 19 g
  39. साठी Hedychium spicatum Rhizome 19 g
  40. हल्दी Curcuma longa Rhizome 19 g
  41. शतपुष्पा Anethum sowa Fruit 19 g
  42. पद्माख Prunus cerasoides Stem 19 g
  43. नागकेशर Mesua ferrea Stamens 19 g
  44. मुष्ट Cyperus rotundus Rhizome 19 g
  45. इन्द्रयाव Holarrhena antidysenterica Seed 19 g
  46. श्रृंगी Pistacia integerrima Gall 19 g
  47. जीवक Pueraria tuberos (Official substitute) Root Tuber 19 g
  48. वृश्भक Microstylis wallichii Root Tuber 19 g
  49. मेदा Polygonatum cirrhifolium Root Tuber 19 g
  50. महामेदा/शतावरी Asparagus racemosus (Official substitute) Root Tuber 19 g
  51. काकोली Withania somnifera (Official substitute) Substitute Root 19 g
  52. क्षीर काकोली/ असगंध Withania somnifera (Official substitute) Substitute Root 19 g
  53. रिद्धि Dioscorea bulbifera (Official substitute) Substitute Root Tuber 19 g
  54. वृद्धि Dioscorea bulbifera (Official substitute) Substitute Root Tuber 19 g
  55. जल/पानी for decoction Water 20 l reduced to 5 l
  56. द्राक्षा Vitis vinifera Dry Fruit 600 g
  57. जल for decoction Water 2.45 l reduced to 1.84 l
  58. शहद Honey 307 g
  59. गुड Jaggery 3.8 kg
  60. धातकी Woodfordia fruticosa Flower 290 g
  61. कंकोल Piper cubeba Fruit 19 g
  62. खस Coleus vettiveroides Root 19 g
  63. सफ़ेद चन्दन Santalum album Heart Wood 19 g
  64. जतिफल Myristica fragrans Seed 19 g
  65. लवंग Syzygium aromaticum Flower Bud 19 g
  66. त्वक Cinnamomum zeylanicum Stem Bark 19 g
  67. ईला Elettaria cardamomum Seed 19 g
  68. तेजपत्र Cinnamomum tamala Leaf 19 g
  69. केशर (Nagakeshara) Mesua ferrea Stamens 19 g
  70. पिप्पली Piper longum Fruit 19 g
  71. कटक फल Strychnos potatorum Seed QS

1- दशमूल आयुर्वेद में बृहत् पंचमूल ( बेल, गंभारी, अरणि, पाटला , श्योनक) और लघु पंचमूल (शलिपर्णी, प्रश्निपर्णी, छोटी कटेली, बड़ी कटेली और गोखरू) का संयोग है। यह त्रिदोषनाशक है। इसके सेवन से शरीर में सूजन, खांसी, सिर दर्द, बुखार, दर्द, अरुचि, अफारा (पेट में गैस), जोड़ों का दर्द आदि नष्ट होते हैं। यह वात रोगों में प्रयोग की जानी वाली उत्तम औषध है।

2- लोध्र को संस्कृत में लोध्र, तिल, तिरीटक शाबर, मालव, गाल्व, हस्ती, हेमपुष्पक आदि नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे लोध, बंगाली में लोधकाष्ठ, मराठी में लोध, गुजरती में लोदर, पठानीलोध, और लैटिन में सिम्प्लेकोस रेसीमोसा कहते हैं। यह अतिसार, आम अथवा रक्तअतिसार, रक्त प्रदर तथा श्वेतप्रदर के उपचार में बहुत लाभप्रद है। यह स्त्रियों के प्रदर की समस्या की प्रमुख औषधि है।

  • रस (taste on tongue): कषाय astringent
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, रुक्ष light and drying
  • वीर्य (Potency): शीत Cooling
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु Pungent

3- पुष्कर Inula racemosa,रस में कटु और कड़वी है, गुण में यह लघु और तीक्ष्ण है। यह उष्ण वीर्य, कटु विपाक और कफ-वातशामक है। पुष्करमूल को हिक्का, अस्थमा, कफ रोग, तथा सांस न आना में लाभप्रद है। यह कास-श्वासहर, हिक्कानिग्रहण, शोथाघ्ना, पांडुशमन, और अर्दित में लाभप्रद है।

4- गिलोय आयुर्वेद की बहुत ही मानी हुई औषध है। इसे गुडूची, गुर्च, मधु]पर्णी, टिनोस्पोरा, तंत्रिका, गुडिच आदि नामों से जाना जाता है। यह एक बेल है जो सहारे पर कुंडली मार कर आगे बढती जाती है। इसे इसके गुणों के कारण ही अमृता कहा गया है। यह जीवनीय है और शक्ति की वृद्धि करती है। इसे जीवन्तिका भी कहा जाता है। गिलोय वात-पित्त और कफ का संतुलन करने वाली दवाई है। यह रक्त से दूषित पदार्थो को नष्ट करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। यह एक बहुत ही अच्छी ज्वरघ्न है और वायरस-बैक्टीरिया जनित बुखारों में अत्यंत लाभप्रद है। यदि रक्त विकार हो, पुराना बुखार हो, यकृत की कमजोरी हो, प्रमेह हो, तो इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

5- द्राक्षा सूखे हुए अंगूर को कहते है। यह बहुत पौष्टिक, मीठे, विरेचक, रक्तवर्धक , कूलिंग और कफ ढीला करने वाले होते हैं । आयुर्वेद में मुख्य रूप से इन्हें खांसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गठिया, पीलिया, प्यास, शरीर, खांसी, स्वर बैठना और सामान्य दुर्बलता आदि को दूरकरने के लिए प्रयोग किया जाता है। द्राक्षा को आँखों और आवाज़ के लिए अच्छा माना गया है। यह शरीर में वायु और पित्त को कम करते हैं। यह तासीर में ठन्डे होते हैं और शरीर में पित्त की अधिकता से होने वाले रोगों जैसे की हाथ-पैर में जलन, नाक से खून गिरना, आदि में विशेष रूप से फायदेमंद हैं। द्राक्षा में कब्ज़, अग्निमांद्य, अधिक प्यास लगना, पेट में दर्द, खून की कमी, और वातरक्त को भी नष्ट करने के गुण हैं।

6- हरीतकी Terminalia chebula आयुर्वेद की रसायन औषधि है। यह पेट रोगों में प्रयोग की जाने वाली सबसे प्रभावी औषध है। इसमें लवण रस, को छोड़ बाकि सभी रस / स्वाद है। यह गुण में लघु, रूक्ष, और स्वभाव से गर्म है। यह एक कटु विपाक औषध है और शरीर के सभी धातुओं पर काम करती है। यह सूजन को दूर करती है। यह मूत्रल और दस्तावर है। यह अफारे को दूर करती है और पेट के कीड़ों को भी नष्ट करती है।

दवा के औषधीय कर्म

  1. अनुलोमन: द्रव्य जो मल व् दोषों को पाक करके, मल के बंधाव को ढीला कर दोष मल बाहर निकाल दे।
  2. एनाल्जेसिक: Analgesic दर्द में राहत
  3. एंटीइन्फ्लेमेटरी: Anti-inflammatory सूजन को कम करना
  4. आक्षेपनाशक: Antispasmodic अनैच्छिक पेशी की ऐंठन से राहत देना
  5. वातहर: द्रव्य जो वातदोष निवारक हो।
  6. कफहर: कफ दोष को संतुलित करना।
  7. वृष्य: द्रव्य जो बलकारक, वाजीकारक, वीर्य वर्धक हो।
  8. रक्तस्तंभक: Styptic
  9. रसायन: द्रव्य जो शरीर की बीमारियों से रक्षा करे और वृद्धवस्था को दूर रखे।
  10. गर्भस्थापना: जो गर्भ की स्थापना में मदद करे।
  11. पाचन: द्रव्य जो आम को पचाता हो लेकिन जठराग्नि को न बढ़ाये।
  12. दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  13. शोधक: द्रव्य जो शरीर की गंदगी को मुख द्वारा या मलद्वार से बाहर निकाल दे।

दशमूलारिष्ट के लाभ/फ़ायदे Benefits of Dashmularishta

  1. यह वात रोगों में बहुत लाभप्रद है।
  2. इसके सेवन से शरीर में सूजन दूर होती है।
  3. यह त्रिदोषनाशक है।
  4. यह प्रसूता रोगों की उत्तम दवा है।
  5. यह पाचक है।
  6. इसके सेवन से रोजोविकर/मासिक धर्म menstrual disorders के विकारों में लाभ होता है।
  7. यह एक गर्भाशय की टॉनिक uterine tonic है और गर्भाशय को बल देती है।
  8. यह इनफर्टिलिटी infertility में भी लाभप्रद है।

दशमूलारिष्ट के चिकित्सीय उपयोग Uses of Dashmularishta

दशमूलारिष्ट का प्रयोग बहुत सी बिमारियों में किया जाता है। यह बहुत से स्त्रीरोगों के उपचार में लाभदायक है। आयुर्वेद का मत है, सभी स्त्रीरोग वात दोष की ख़राबी से उत्पन्न होते हैं और दशमूल, वात रोगों की सबसे अच्छी दवा है। यह सूजन को कम करता है और शरीर का पोषण करता है।

दशमूलारिष्ट सूतिका रोग की (पोस्ट-डिलीवरी डिसआर्डर) post delivery बहुत अच्छी दवा है। यह एक टॉनिक है जो शरीर की कमजोरी को दूर कर भूख बढाती है। इसके सेवन से बुखार, खांसी, थकावट आदि दूर होते हैं

यह नई माँ (प्रसव बाद अथवा प्रसूता स्त्री) के लिए निम्नलिखित वजहों से लाभप्रद है: –

  1. प्रसव के बाद महिलाओं में कमी को पूरा करने में मदद
  2. पोस्ट-डिलीवरी कमजोरी को दूर करना
  3. गर्भाशय को सामान्य आकार लेने में मदद
  4. नई माँ में दूध की मात्रा को बढ़ाना
  5. मन्दाग्नि दूर करने के लिए
  6. शरीर से विजातीय पदार्थों को दूर करना
  7. प्रसव बाद आने वाले बुखार को दूर करना
  8. प्रसव के बाद कमजोरी दूर करना

यह अन्य स्त्री-रोगों में भी फायदेमंद है: –

  1. रजोनिवृत्ति menopause
  2. सामान्य कमज़ोरी general debility
  3. मासिक धर्म के दौरान दर्द pain during menses
  4. महिला बांझपन, ovulation के संबंधित विकारों female infertility
  5. स्वस्थ महिला प्रजनन प्रणाली को बनाए रखने और गर्भ धारण करने की संभावना को बढ़ाना
  6. गर्भाशय की कमजोरी uterus weakness
  7. बार-बार होने वाला गर्भपात recurrent miscarriage

स्त्रीरोगों के अतिरिक्त दशमूलारिष्ट बहुत सी अन्य सामान्य बिमारियों में लाभप्रद हैं।

कुछ लोग समझते हैं, दशमूलारिष्ट केवल स्त्रियों के लिए है। परन्तु ऐसा नहीं है। यह एक रसायन है जो की स्त्री-पुरुष सभी के लिए लाभप्रद है। पुरुषों द्वारा इसके सेवन से शुक्र शोधन होता है, पाचन बेहतर होता है और शरीर में बल आता है।

स्त्री-पुरुष सभी इसे निम्न रोगों में ले सकते हैं:

उदर रोग / पेट के रोग / पाचन की दिक्कतें

  • भूख न लगना low appetite, anorexia
  • अपच indigestion
  • ग्रहणी (malabsorption syndrome)
  • उलटी, गुल्म
  • पेट रोग diseases of stomach
  • पांडू (anaemia), कामला (jaundiue)
  • अर्श piles, भगंदर fistula

कफ रोग

  • कफ cough
  • अस्थमा asthma

मूत्र रोग

  • प्रमेह, मूत्रविबंध (retention of urine)
  • मेह (excessive flow of urine)
  • शर्करा (gravel in urine)
  • अश्मरी (Calculi)

तथा बहुत से अन्य रोग

  • शुक्र क्षय (deficiency of semen)धातुक्षय
  •  खून की कमी anaemia
  • शुक्र शोधन
  • कमजोरी, थकावट, lethargy, low energy

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Dashmularishta

  1. यह आयुर्वेद का अरिष्ट है और इसे लेने की मात्रा 12-24 मिलीलीटर है।
  2. दवा को पानी की बराबर मात्रा के साथ-साथ मिलाकर लेना चाहिए।
  3. इसे सुबह नाश्ते के बाद और रात्रि के भोजन करने के बाद लें।
  4. इसे भोजन के 30 मिनट में बाद, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  5. इस दवा को 3 महीने या उससे अधिक समय तक लें।
  6. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  2. इसे निर्धारित मात्रा में लें।
  3. इसे खाली पेट न लें।
  4. इसमें गुड़, शहद, द्राक्षा है इसलिए डायबिटीज में इसका सेवन न करें।
  5. इसमें 5-10% self-generated अल्कोहल है।
  6. दवा के सेवन के दौरान गरिष्ठ भोजन, घी, दूध, चीनी, चावल, आदि का सेवन न करें।
  7. नियमित व्यायाम करें।

उपलब्धता

यह एक OTC आयुर्वेदिक दवा है और ऑनलाइन या दवा स्टोर्स से खरीदी जा सकती है। इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

  1. बैद्यनाथ Baidyanath Dashmularishta 450ml @ Rs. 145.00
  2. डाबर Dabur Dashmularishta Price/MRP: 450ml @ Rs. 115.00
  3. सन्डू Sandu Dashmularishta
  4. पतंजलि Patanjali Divya Pharmacy Dashmularishta 450ml @ Rs. 85.00 इत्यादि।
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5 thoughts on “Dashmularishta Details and Uses

  1. Hello maam mujhe 6 months se priods bohat late horhe hain bina dawa liye hote nhi hain to kya ye syrup mujhe fayda krega.

  2. Can daibetic mother take dashamulrishta after c section delivery ? I am taking insulin and oral tab. Is it safe and beneficial for me ? Please suggest me coz i am suffering so many physical problems after c section.

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