प्राकृतिक गर्भनिरोध के उपाय Natural Contraception in Hindi

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हर कपल जो बच्चा नहीं चाहता उसे किसी न किसी प्रकार के गर्भनिरोधक का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। असुरक्षित सेक्स से कन्सेप्शन conception की संभावना बहुत अधिक रहती है। बिना प्लान किये यदि गर्भ ठहर जाता है और बच्चा नहीं चाहिए होता तो मानसिक व शारीरिक दोनों ही तरह के कष्ट उठाने पड़ते हैं। गर्भपात के निर्णय से तो महिला का स्वास्थ्य बहुत अधिक बुरी तरह से प्रभावित होता है।

गर्भपात कराने से महिला में गिल्ट फीलिंग आता है, खून की कमी हो जाती है, और आगे गर्भधारण में जटिलताएं आ जाती हैं। यदि गर्भपात बार-बार किया जाता है तो गर्भाशय कमज़ोर हो जाता है, और भविष्य में होने वाले गर्भधारण में इसके फटने, अपने आप गर्भपात होने व समय पूर्व बच्चे के जन्म होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चेदानी का मुंह समय से पहले खुल जाता है और प्रीटर्म डिलीवरी preterm delivery हो जाती है। इस प्रकार पैदा हुआ बच्चा कमजोर होता है और विकृतियों का शिकार हो सकता है। कई मामलों में यदि सर्जिकल एबॉर्शन कराने के दौरान प्रजनन अंगों में किसी तरह का विकार आ जाता है तो बाँझपन infertility भी हो सकता है।

इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है की कपल्स कोई न कोई गर्भनिरोधक प्रयोग करें। बाजार में बहुत तरह के परिवार नियोजन के साधन मौजूद हैं, जैसे की गर्भनिरोधक गोलियां, इमरजेंसी कॉण्ट्रासेप्टिव पिल्स emergency contraceptive pills, कॉपर टी, कॉण्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन, इम्प्लान्ट्स, रॉड्स, और कंडोम्स condoms आदि। ये सभी कृत्रिम गर्भनिरोधक उपाए हैं और कंडोम छोड़ कर सभो महिला में हॉर्मोन को प्रभावित करके बच्चा ठहरने से रोकते हैं।

परिवार नियोजन के प्राकृतिक उपाय

कुछ ऐसे भी प्राकृतिक तरीकें हैं जिनका यदि सही से प्रयोग किया जाए तो गर्भाधान को रोका जा सकता है। प्राकृतिक गर्भनिरोधक, उन तरीकों को कहते हैं जिन्हें अपनाकर गर्भ ठहरने से रोका जा सकता है। इन तरीकों का प्रयोग करते समय किसी भी तरह की गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाता और केवल फर्टिलिटी को ध्यान में रखते हुए गर्भ ठहरने से रोका जाता है। यह पूरी तरह से नेचुरल होते हैं और इनका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता।

परन्तु यह बात अवश्य ध्यान रखें की कोई भी तरीका चाहे, कृत्रिम हो या प्राकृतिक गर्भ को रोकने में पूरी तरह से या 100 प्रतिशत सफल नहीं है।

यदि प्राकृतिक उपाय सही से न किये जाएँ तो गर्भ ठहरने की संभावना बहुत अधिक है। उदाहरण के लिए, यदि मासिक शुरू होने के पांच – छः दिन पहले असुरक्षित सेक्स किया जाए तो गर्भ ठहरने की संभावना न के बराबर है, लेकिन यह तभी संभव है जब महिला का मासिक नियमित हो और उसे अगले पीरियड के शुरू होने की डेट सही से पता हो। यदि स्त्री का मसिक धर्म अनियमित है तो यह पता लगा पाना बहुत ही मुश्किल है।

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इसी प्रकार लोगों को भ्रान्ति है की बच्चे के जन्म के तुरंत बाद और स्तनपान के दौरान, अगला बच्चा ठहरने की संभावना नहीं होती। यह बात पूर्ण रूप से गलत है। डिलीवरी के बाद, कुछ महिलायों में तुरंत और कुछ में कई महीने बाद मासिक शुरू हो जाता है। यदि तुरंत मासिक नहीं शुरू हुआ है तो यह भी बता पाना मुश्किल है की यह वापस से कब आना शुरू होगा। ऐसे में यदि असुरक्षित सम्बन्ध बनते हैं तो गर्भावस्था होने के पूरे आसार हैं।

इसलिए, कृपया ध्यान रखें प्राकृतिक गर्भनिरोधन पूरी तरह से प्रभावी नहीं है और यदि थोड़ी भी चूक होती है तो गर्भावस्था हो सकती है।

सुरक्षित मासिक चक्र / सेफ पीरियड / कैलेंडर वाच Safe Method

सेफ पीरियड, मासिक धर्म के वे दिन हैं जिनके दौरान कन्सेप्शन का ख़तरा नहीं होता है। इस तरीके में ओव्यूलेशन पीरियड को जान कर उस दौरान असुरक्षित शारीरिक संबंध न रखने की सावधानियां बरती जाती है।

सामान्यतः महिलाओं में अगला पीरियड शुरू होने के 14 दिन पहले ही ओव्यूलेशन होता है। ओव्यूलेशन के दौरान एक अंडाणु ओवरी से निकल कर फैलोपियन ट्यूब में आता है। यह अंडाणु कई घंटों तक जीवित रहता है और ऐसे में इसे शुक्राणु मिल जाता है तो यह निषेचित या फर्टिलाइज हो जाता है और इस प्रकार गर्भावस्था शुरू हो जाती है। महिला के शरीर में शुक्राणु सैक्स के बाद 24 से 48 घंटे तक जीवित रहते हैं। तो यदि मासिक धर्म के बीच के दिनों में सेक्स किया जाता है तो गर्भधारण के चांसेस बहुत ज्यादा होता हैं। यह गर्भधारण के लिए, सबसे सही दिन होते हैं और फर्टिलिटी विंडो कहलाते हैं।

यदि ओव्यूलेशन होने और अंडे के शरीर में घटित होने के बाद सेक्स किया जाए तो गर्भावस्था संभव ही नहीं है। मासिक आने के एक सप्ताह पहले का समय भी सेफ पीरियड है।

मासिक की ब्लीडिंग रुकने के तुरंत बाद का समय कुछ महिलायों में सुरक्षित नहीं होता। ऐसा इसलिए है की हो सकता है उनमें ओव्यूलेशन जल्दी हो जाए दो दिन तक जीवित रह सकने वाले शुक्राणु , अंडाणु को निषेचित कर दें।

नुकसान: यह तरीका पूरी तरह से कामयाब नहीं है। यह उपाय अनियमित मासिकधर्म में काम नहीं करता।

टेम्परेचर मेथड Temperature Method

इस तरीके में भी ओव्यूलेशन के संभावित समय को शरीर का टैंप्रेचर चैक कर के जाना जाता है और उसी के अनुसार सैक्स करने या न करने का निर्णय लिया जाता है। इस में महिलाओं को तकरीबन रोज ही अपने टैंप्रेचर को नोट करना होता है। ओव्यूलेशन से पहले शरीर का तापमान यदि 96 to 98°F तो ओव्यूलेशन के बाद यह 97 to 99°F हो जाता है। सटीक तापमान नापने के लिए ऐसे थर्मामीटर हो होना ज़ृति हैं जो केवल 100 °F तक तापमान नापे जिससे एक्यूरेसी अधिक हो।

नुकसान : यह उपाय भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिन की माहवारी नियमित नहीं होती।

स्खलन विधि Ejaculation Method

इस विधि में पुरुष को स्खलन से पहले लिंग को योनि से बाहर निकाल लेना चाहिए।

नुकसान : सेक्स के दौरान पुरुष पार्टनर को लगातार इस बात का ध्यान रखना पड़ता है और यदि असावधानी हुई तो गर्भ ठहर सकता है। इस के अतिरिक्त शुरू में निकलने वाले स्राव में कुछ मात्रा में स्पर्म्स भी हो सकते हैं। इसलिए यह विधि कामयाब नहीं है।

सर्वाइकल म्यूकस मेथड Cervical Mucous Method

सर्वाइकल म्यूकस मेथोस में सर्विक्स से निकलने वाले म्यूकस को चेक करते हैं। ओव्यूलेशन के पहले और बाद में योनि में मौजूद म्युकस में बदलाव आते हैं। मासिक के तुरंत बाद कुछ दिन तक तो कम म्यूकस निकलता है लेकिन ओव्यूलेशन होने के आस-पास यह अधिक मात्रा में आता है। ओव्यूलेशन के बाद आने वाला म्यूकस पारदर्शी और साफ़ होता है। यह बहुत चिकना और फिसलने वाला होता है। यह स्ट्रेचेबल होता है और अंगूठे और ऊँगली के बीच लगाने पर खिंचता है।

ओव्यूलेशन के बाद यह यह कम हो जाता है और कुछ क्रीमी सा दिखता है। तो इस तरीके में ज्यादा म्यूकस का मतलब है ज्यादा फर्टिलिटी और इस समय असुरक्षित सम्बन्ध से गर्भ धारण की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इस दौरान प्रोटेक्शन के बिना सेक्स नहीं किया जाना चाहिए।

ऊपर बताये तरीकों को फर्टिलिटी अवेयरनेस बेस्ड मेथड fertility awareness method कहा जाता है क्योंकि इनमें फर्टिलिटी कब सबसे ज्यादा है, को जानकर उस दौरान या तो सेक्स को अवॉयड किया जाना चाहिए या कोई अन्य कंट्रासेप्शन का तरीका अपनाना चाहिए।

यह तरीके तभी कारगर हैं जब इन्हें सही से प्रयोग किया जाए। करीब 100 में से 25 लोग जो इन तरीकों को अपनाते हैं, उन में गर्भावस्था हो जाती है। यह सभी प्रयोग महिला और पुरुष दोनों पर निर्भर हैं। इसलिए दोनों को ही इन मेथड को सही से प्रयोग करना आना चाहिए। यह तभी कारगर हो सकते हैं, यदि दोनों ही एक दूसरे को सपोर्ट करें और असुरक्षित दिनों में कोई भी कृत्रिम तरीका जैसे की कंडोम, फीमेल कंडोम, सर्वाइकल कैप, स्पर्मीसाइड आदि का इस्तेमाल करें।

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