यकृत-प्लीहांरि लौह Yakrit Plihari Loha Detail and Uses in Hindi

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यकृत-प्लीहांरि लौह, आयुर्वेद की प्लीहा और लीवर के लिए विकारों के लिए लौह कल्प है। लौह कल्प वे दवाएं हैं जिनमें लोह भस्म एक प्रमुख घटक है। यह दवाएं शरीर में लोहे के स्तर को सही करते है। यकृत-प्लीहांरि लौह आयुर्वेद की एक हर्बल और मिनरल के संयोग से बनी दवा है। इसमें पारद, गंधक, जमालघोटा, शिलाजीत आदि हैं जो की इसे लीवर के रोगों की चिकित्सा में प्रभावी बनाते हैं। इसके सेवन से पेट रोग, पेट फूलना, भूख न लगना, पाचन की कमजोरी, आदि रोगों से राहत मिलती है।

यकृत और प्लीहा या तिल्ली शरीर के दो अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। इनमें किसी भी प्रकार का रोग सीधे भूख, पाचन, शरीर की धातुओं, को प्रभावित करता है। लीवर के रोग होने पर शरीर की कान्ति नष्ट हो जाती है तथा शरीर में विभिन्न लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शरीर में सूजन हो जाती है तथा बुखार आने लगता है। लीवर में वृद्धि हो जाती है। इसमें दर्द रहता है और मल में भी आंव आने लगता है। कब्ज़ हो जाती है और पेट में भी वायु भर जाती है। शरीर में रक्त, रसादि, और धातुओं की कमी हो जाती है। ऐसे में यकृत-प्लीहांरि लौह का सेवन एनीमिया, लीवर रोग को दूर करता है और शरीर में पाचक पित्त को बढ़ा देता है साथ ही इसमें जमाल घोटा होने के कारण मल भी आसानी से निकल जाता है। नियमित उपयोग से शरीर में खून की कमी दूर होती है और यकृत भी स्वस्थ्य होने लगता है।

Yakrit Plihari Loha is a lauha kalpa of Ayurveda. The chief ingredient in this medicine is Lauha Bhasma. Intake of this medicine gives relief in liver and spleen disorders and associated ailments. It cures deficiency of iron and constipation. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

यकृत-प्लीहांरि लौह के घटक Ingredients of Yakrit Plihari Loha

  • हिंगुलसम्भवा सुता (हिंगुलोत्था परदा) 1 Part
  • गंधक शुद्ध 1 Part
  • लौह (भस्म) 1 Part
  • अभ्रक (भस्म) 1 Part
  • ताम्र (भस्म) 2 Parts
  • शिला (शुद्ध मनःशिला) 2 Parts
  • रजनी (हरिद्रा) (Rz.) 2 Parts
  • जयपाल शुद्ध (Sd.) 2 Parts
  • टांगना (Shuddha टंकण) 2 Parts
  • शिलाजतु शुद्ध 2 Parts
  • दन्ती स्वरस (Rt.) Q. S. भावना 2 बार
  • त्रिवृत स्वरस (Rt.) Q. S. भावना 2 बार
  • चित्रक रस (Rt.) Q. S. भावना 2 बार
  • निर्गुण्डी रस (Lf.) Q. S. भावना 2 बार
  • त्र्यूषणा (शुंठी मरीचा पिप्पली) क्वाथा Q. S. भावना 2 बार
  • आर्द्रक रस (Rz.) Q. S. for भावना 2 बार
  • भृंगराज रस (Pl.) Q. S. for भावना 2 times

यकृत-प्लीहांरि लौह के लाभ/फ़ायदे Benefits of Yakrit Plihari Loha

  • इसके सेवन से पुराने यकृत और प्लीहा के रोग दूर होते हैं।
  • यह पेट के रोगों, पेट फूलना,अग्निमांद्य, अरुचि को नष्ट करता है।
  • लीवर के रोगों के कारण शरीर में सूजन, दर्द, और हल्के बुखार में इसके सेवन से बहुत लाभ होता है।
  • यह कब्ज़ से राहत देता है।
  • यह यकृत और लीवर के सभी प्रकार के रोगों की दवा है।

यकृत-प्लीहांरि लौह के चिकित्सीय उपयोग Uses of Yakrit Plihari Loha

  • उदररोग (Ascites)
  • अनाह (Distension of abdomen due to obstruction to passage of urine and stools)
  • ज्वर (Fever)
  • पाण्डु (Anaemia)
  • कमाला (Jaundice)
  • शोथ (Inflammation)
  • हलीमक (Chronic obstructive Jaundice/Chlorosis/Advanced stage of Jaundice)
  • मंदाग्नि (Impaired digestive fire)
  • अरुचि (Tastelessness)
  • यकृतप्लीहारोग (Disorder of Liver and Spleen)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Yakrit Plihari Loha

  • 1 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे गो-मूत्र या तक्र के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

You can buy this medicine online or from medical stores.

This medicine is manufactured by Baidyanath (Yakritplihari Lauha), Unjha (Yakrit Plihari Loha) and many other Ayurvedic pharmacies.

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