तुलसी घनवटी Tulsi Ghan Vati Detail and Uses in Hindi

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तुलसी घन वटी, तुलसी की पत्तियों से तैयार एक आयुर्वेदिक दवाई है जो की पतंजलि द्वारा निर्मित है। इस दवा में एकमात्र घटक तुलसी है। ऐसे तो इसे विविध रोगों में प्रयोग किया जा सकता है लेकिन इसका मुख्य प्रयोग बुखार और इम्युनिटी बढ़ाने में है।

पवित्र तुलसी, हर हिन्दू के लिए पूजनीय है। यह एक औषधि भी है जो की रक्तविकार, पसली पीड़ा, पित्त की कमी, बुखार, कफ, अस्थमा आदि को दूर करती है। तुलसी के पत्तों का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Tulsi Ghan Vati is herbal Ayurvedic medicine containing Ghan Sattva or herbal extract of Ocimum sanctum or Holy Basil. It improves body immunity and helps in various ailments.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  1. उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  2. दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवाई
  3. मुख्य उपयोग: ज्वर, कम रोगप्रतिरोधक क्षमता, कमजोरी
  4. मुख्य गुण: रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना, एंटीऑक्सीडेंट, और टॉनिक
  5. मूल्य: PATANJALI TULSI GHAN VATI 40 gm @ INR 90.00

तुलसी घन वटी के घटक Ingredients of Tulsi Ghan Vati

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इस दवा का एकमात्र घटक तुलसी है।

प्रत्येक गोली में 500mg तुलसी एक्सट्रेक्ट है।

तुलसी के आयुर्वेदिक गुण और कर्म

तुलसी स्वाद में कटुकड़वी, गुण में रूखा करने वाली और हलकी है। स्वभाव से यह गर्म है और कटु विपाक है।

यह कटु रस औषधि है। कटु रस जीभ पर रखने से मन में घबराहट करता है, जीभ में चुभता है, जलन करते हुए आँख मुंह, नाक से स्राव कराता है। कटु रस तीखा होता है और इसमें गर्मी के गुण होते हैं। गर्म गुण के कारण यह शरीर में पित्त बढ़ाता है, कफ को पतला करता है। यह पाचन और अवशोषण को सही करता है। इसमें खून साफ़ करने और त्वचा रोगों में लाभ करने के भी गुण हैं। कटु रस गर्म, हल्का, पसीना लाना वाला, कमजोरी लाने वाला, और प्यास बढ़ाने वाला होता है। यह रस कफ रोगों में बहुत लाभप्रद होता है। गले के रोगों, शीतपित्त, अस्लक / आमविकार, शोथ रोग इसके सेवन से नष्ट होते हैं। यह क्लेद/सड़न, मेद, वसा, चर्बी, मल, मूत्र को सुखाता है। यह अतिसारनाशक है। इसका अधिक सेवन शुक्र और बल को क्षीण करता है, बेहोशी लाता है, सिराओं में सिकुडन करता है, कमर-पीठ में दर्द करता है। पित्त के असंतुलन होने पर कटु रस पदार्थों को सेवन नहीं करना चाहिए।

तिक्त रस, वह है जिसे जीभ पर रखने से कष्ट होता है, अच्छा नहीं लगता, कड़वा स्वाद आता है, दूसरे पदार्थ का स्वाद नहीं पता लगता, जैसे की नीम, कुटकी। यह स्वयं तो अरुचिकर है परन्तु ज्वर आदि के कारण उत्पन्न अरुचि को दूर करता है। यह कृमि, तृष्णा, विष, कुष्ठ, मूर्छा, ज्वर, उत्क्लेश / जी मिचलाना, जलन, समेत पित्तज-कफज रोगों का नाश करता है।

  • रस (taste on tongue): कटु, तिक्त
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, रुक्ष
  • वीर्य (Potency): उष्ण
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु

यह उष्ण वीर्य है। वीर्य का अर्थ होता है, वह शक्ति जिससे द्रव्य काम करता है। आचार्यों ने इसे मुख्य रूप से दो ही प्रकार का माना है, उष्ण या शीत। उष्ण वीर्य औषधि वात, और कफ दोषों का शमन करती है। यह शरीर में प्यास, पसीना, जलन, आदि करती हैं। इनके सेवन से भोजन जल्दी पचता (आशुपाकिता) है।

विपाक का अर्थ है जठराग्नि के संयोग से पाचन के समय उत्पन्न रस। इस प्रकार पदार्थ के पाचन के बाद जो रस बना वह पदार्थ का विपाक है। शरीर के पाचक रस जब पदार्थ से मिलते हैं तो उसमें कई परिवर्तन आते है और पूरी पची अवस्था में जब द्रव्य का सार और मल अलग हो जाते है, और जो रस बनता है, वही रस उसका विपाक है।

कटु विपाक, द्रव्य आमतौर पर मल-मूत्र को बांधने वाले होते हैं। यह शुक्रनाशक माने जाते हैं। और शरीर में गर्मी या पित्त को बढ़ाते है।

कर्म Principle Action

  1. कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  2. दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  3. पित्तकर: द्रव्य जो पित्त को बढ़ाये।
  4. स्वेदल: द्रव्य जो स्वेद / पसीना लाये।
  5. श्वासकासहर: द्रव्य जो श्वशन में सहयोग करे और कफदोष दूर करे।
  6. हृदय: द्रव्य जो हृदय के लिए लाभप्रद है।
  7. कुष्ठघ्न: द्रव्य जो त्वचा रोगों में लाभप्रद हो।

तुलसी घन वटी के लाभ/फ़ायदे Benefits of Tulsi Ghan Vati

  1. तुलसी घन वटी का सेवन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह बार-बार होने वाले इन्फेक्शन में लाभ करती है।
  2. तुलसी घन वटी को लेना सरल है।
  3. इसमें तुलसी के गुण हैं।
  4. यह यकृत की रक्षा करती है।
  5. यह इम्युनिटी को बढ़ाती है।
  6. यह बैक्टीरिया / वायरस / इन्फेक्शन के कारण तथा अन्य कारणों से होने वाले बुखार में बहुत प्रभावशाली है।
  7. यह एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल, एंटीमिक्रोबिअल, एंटीवायरल और एंटी-पाईरेटिक (बुखार को कम) है।

तुलसी घन वटी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Tulsi Ghan Vati

  1. एंटीऑक्सीडेंट Antioxidant
  2. अस्थमा Asthma
  3. ब्रोंकाइटिस Bronchitis
  4. सर्दी-खांसी-जुखाम Cold, Cough, Congestion
  5. प्रजनन और पेशाब अंगों के रोग Disorders of genito-urinary system
  6. ज्वर Fever
  7. कम इम्युनिटी Low immunity, Immunomodulator
  8. बार-बार होने वाला इन्फेक्शन Recurrent infections
  9. चमड़ी के रोग

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Tulsi Ghan Vati

  1. व्यस्क, इसकी 1 से 2 गोली, दिन में दो बार अथवा तीन बार लें।
  2. 5-12 वर्ष के बच्चों को आधा गोली दी जा सकती है।
  3. बहुत छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर के परामर्श के इसे न दें।
  4. इसे शहद, पानी के साथ लें।
  5. इसे खाली पेट लें।
  6. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. निर्धारित मात्रा में लेने पर इस दवा के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखे गए हैं।
  2. इसे कुछ महीनों तक लिया जा सकता है।
  3. तुलसी स्वभाव से गर्म Hot Potency है। पित्त की अधिकता में इसे सावधानी से लें।
  4. गर्भावस्था में किसी भी हर्बल दवा का सेवन बिना डॉक्टर के परामर्श के न करें।
  5. तुलसी का सेवन करने के तुरंत बाद दूध न पियें।
  6. इसे पानी अथवा शहद के साथ लें।
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