राजवैद्य रसायन वटी Rajvaidya Rasayan Vati Detail and Uses in Hindi

loading...

रसायन वटी, राजवैद्य शीतल प्रसाद एंड संस द्वारा निर्मित एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह दवा पुरुष के लिए है और उनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य को सही करती है। यह एक रसायन अथवा टॉनिक है जो की शरीर को उर्जा, शक्ति और जोश देती है। इसके सेवन से थकावट, चिड़चिड़ापन, काम में मैन न लगना, शारीरिक कमजोरी, शरीर में दर्द, जोड़ों में दर्द, सांस फूलना, पाचन की कमजोरी आदि समस्याएं दूर होती है। यह रक्त और वीर्य वर्धक है।

यह एक यौन टॉनिक है और पुरुषों मे यौन दुर्बलता में भी लाभकारी है। यह यौन शक्ति को बढ़ाने में मदद करती है है। यह दवा नाड़ी (नर्वस सिस्टम), गुर्दे और वीर्य वाहिकाओ पर विशेष प्रभाव पैदा डालती है। इसके सेवन से अवसाद, स्ट्रेस आदि में लाभ होता है।

यह पुरुषों के लिए अति उत्तम टॉनिक है। इसकी एक से दो गोली, सुबह और शाम दूध के साथ ली जानी चाहिए।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Rajvaidya Rasayan Vati is a Health Tonic for males. This medicine is useful in fatigue, general debility, and sexual disorders of male (night fall, erectile dysfunction, low libido, premature ejaculation and for improving performance).

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

loading...
  • निर्माता / ब्रांड: राजवैद्य शीतल प्रसाद एंड संस
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आयुर्वेदिक दवाई
  • मुख्य उपयोग: पुरुषों के लिए टॉनिक
  • मुख्य गुण: एंटीऑक्सीडेंट, रसायन, टॉनिक
  • दवा का अनुपान: गर्म जल अथवा गर्म दूध
  • दवा को लेने का समय: दिन में दो बार, प्रातः और सायं
  • दवा को लेने की अवधि: कुछ महीने

मूल्य:

  • 30 tabs @ INR 185.00
  • 60 tab @ INR 378.00
  • 200 tabs @ INR 968.00

राजवैद्य रसायन वटी के घटक Ingredients of Rajvaidya Rasayan Vati

Each pill is prepared from

  1. Loh Bhasm 50 mg
  2. Abhrak Bhasm 10 mg
  3. Swarn Makshik Bhasm 10 mg
  4. Yashad Bhasm 40 mg
  5. Mukta Pisti 10 mg
  6. Praval Pisti 10 mg
  7. Jaiphal 20 mg
  8. Bung Bhasm 10 mg
  9. Asgand 50 mg
  10. Dalchini 20 mg
  11. Javitiri 10 mg
  12. Gokhru 25 mg
  13. Kauch Beej 90 mg
  14. Shilajeet 50 mg
  15. Sauth 10 mg
  16. Mirch 10 mg
  17. Pipli 10 mg
  18. Amla 10 mg
  19. Kesar 20 mg
  20. Manjit 10 mg
  21. Anant Mool 10 mg
  22. Brahmi 10 mg
  23. Musali 25 mg
  24. Shatavar 20 mg
  25. Swarn Bung Q।S
  26. Excipients

Kauch Beej 90 mg

केवांच की गिरी बहुत ही प्रभावशाली हर्बल दवा है तथा इसे हजारों वर्षों से पुरुष प्रजनन क्षमता में सुधार करने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। यह हाइपोथेलेमस पर काम करता है। इसके सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन, लुटीनाइज़िंग luteinizing हार्मोन, डोपामाइन, एड्रेनालाईन, आदि में सुधार होता है। यह शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में भी उचित सुधार करने वाली नेचुरल दवा है। मानसिक तनाव, नसों की कमजोरी, टेस्टोस्टेरोन के कम लेवल आदि में इसके सेवन से बहुत लाभ होता है।

Shilajeet 50 mg

शिलाजीत पहाड़ों से प्राप्त, सफेद-भूरा मोटा, चिपचिपा राल जैसा पदार्थ है (संस्कृत शिलाजतु) जिसमे सूजन कम करने, दर्द दूर करने, अवसाद दूर करने, टॉनिक के, और एंटी-ऐजिंग गुण होते हैं। इसमें कम से कम 85 खनिजों पाए जाते है। शिलाजीत एक टॉनिक है जो पुरुषों में यौन विकारों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

  1. शिलाजीत रस में अम्लीय और कसैला, कटु विपाक और समशीतोष्ण (न अधिक गर्म न अधिक ठंडा) है।
  2. ऐसा माना जाता है, संसार में रस-धातु विकृति से उत्पन्न होने वाला कोई भी रोग इसके सेवन से दूर हो जाता है। शिलाजीत शरीर को निरोगी और मज़बूत करता है।
  3. यह पुरुषों के प्रमेह की अत्यंत उत्तम दवा है।
  4. यह वाजीकारक है और इसके सेवन से शरीर में बल-ताकत की वृद्धि होती है।
  5. यह पुराने रोगों, मेदवृद्धि, प्रमेह, मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, कम्पवात, जोड़ो का दर्द, सूजन, सर्दी, खांसी, धातु रोग, रोगप्रतिरोधक क्षमता की कमी आदि सभी में लाभप्रद है।
  6. यह शरीर में ताकत को बढाता है तथा थकान और कमजोरी को दूर करता है।
  7. यह यौन शक्ति की कमी को दूर करता है।
  8. यह भूख को बढाता है।
  9. यह पुरुषों में नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculation, कम शुक्राणु low sperm count, स्तंभन erectile dysfunction में उपयोगी है।
  10. यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
  11. शिलाजीत के सेवन के दौरान, आहार में दूध की प्रधानता रहनी चाहिए।

Asgand 50 mg

अश्वगंधा को असगंध, आसंध और विथानिया, विंटर चेरी आदि नामों से जाना जाता है। इसकी जड़ को सुखा, पाउडर बना आयुर्वेद में वात-कफ शामक, बलवर्धक रसायन की तरह प्रयोग किया जाता है।

यह एक टॉनिक दवा है। यह शरीर को बल देती है। असगंध तिक्त-कषाय, गुण में लघु, और मधुर विपाक है। यह एक उष्ण वीर्य औषधि है। यह वात-कफ शामक, अवसादक, मूत्रल, और रसायन है जो की स्पर्म काउंट को बढ़ाती है।

  1. यह जड़ी बूटी पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है।
  2. यह पुरुष प्रजनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालती है।
  3. यह पुरुषों में जननांग के विकारों के लिए एक बहुत ही अच्छी दवा है।
  4. यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करती है।
  5. यह शुक्र धातु की कमी, उच्च रक्तचाप, मूर्छा भ्रम, अनिद्रा, श्वास रोगों, को दूर करने वाली उत्तम वाजीकारक औषधि है।

Loh Bhasm 50 mg

लौह भस्म आयरन का ऑक्साइड है और आयुर्वेद बहुत अधिक प्रयोग होता है। यह क्रोनिक बिमारियों के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पांडू रोग या अनीमिया को नष्ट करता है।

Gokhru 25 mg

गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है। गोखरू शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। यह पथरी, पुरुषों के प्रमेह, सांस की तकलीफों, शरीर में वायु दोष के कारण होने वाले रोगों, हृदयरोग और प्रजनन अंगों सम्बन्धी रोगों की उत्तम दवा है। यह वाजीकारक है और पुरुषों के यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

गोखरू का प्रयोग यौन शक्ति को बढ़ाने में बहुत लाभकारी माना गया है। यह नपुंसकता, किडनी/गुर्दे के विकारों, प्रजनन अंगों की कमजोरी-संक्रमण, आदि को दूर करता है।

Musali 25 mg

मुसली को हर्बल वियाग्रा के रूप में जाना जाता है। यह पुरुष प्रजनन प्रणाली को दुरुस्त करती है। मुसली की जड़ों को पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए एक पोषक टॉनिक के रूप में कार्य करती है।

Trikatu 30 mg

त्रिकटु सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली का संयोजन है। यह आम दोष (चयापचय अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों), जो सभी रोग का मुख्य कारण है उसको दूर करता है। यह बेहतर पाचन में सहायता करता है और यकृत को उत्तेजित करता है। यह तासीर में गर्म है और कफ दोष के संतुलन में मदद करता है।

Vang Bhasma

वंग या बंग भस्म, स्टेनम या टिन की भस्म है। इसे आयुर्वेद में हल्का, दस्तावर, रूखा, गर्म, पित्तकारक माना गया है। इसे मुख्य रूप से प्रमेह, कफ, कृमि, पांडू, श्वास रोगों में प्रयोग कियाजाता है। शुद्ध वांग को सम्पूर्ण प्राकर के प्रमेहों को नष्ट करने वाला कहा गया है। बंग भस्म का सेवन शरीर को बल देता है, इन्द्रियों को शक्ति देता है और पुरुषों के सभी अंगों को ताकत से भरता है तथा पुरुष होर्मोन का भी अधिक स्राव कराता है। यह मुख्य रूप से प्रजनन अंगों के लिए ही उपयोगी है। बंग भस्म वाजीकारक भी है।

Praval Pishti

प्रवाल पिष्टी, कोरल या मूंगे की पिष्टी है। पिष्टी का शाब्दिक अर्थ पीस कर बनाया चूर्ण। पिष्टी के निर्माण के लिए जिस पदार्थ की पिष्टी बनानी होती है उसे सर्वप्रथम शोधित या साफ़ किया जाता है। फिर इसे गुलाब जल की भावना देकर सूर्य अथवा चाँद की रौशनी में सुखाया जाता है। भावना दे कर सुखाने का क्रम सात दिन या उससे ज्यादा दिन तक किया जाता है जब तक की उसे पीसने से एकदम बारीक चूर्ण या पाउडर न बन जाए। क्योंकि इसके निर्माण में अग्नि का प्रयोग बिलकुल ही नहीं किया जाता इस कारण से पिष्टी को अनअग्नितप्त भस्म भी कहा जाता है।

प्रवाल पिष्टी का प्रयोग शुक्रस्थान की कमजोरी को दूर करता है। इसे कैल्शियम की कमी, शरीर में अधिक गर्मी, रक्त बहने के विकारों, बिना बलगम की खांसी, सामान्य दुर्बलता, अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस, हेपेटाइटिस, पीलिया, मूत्र में जलन, कमजोरी आदि में आंतरिक रूप से दिया जाता है।

कर्म Principle Action

  1. बाजीकरण: द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करे।
  2. शुक्रकर: द्रव्य जो शुक्र का पोषण करे।
  3. वृष्य: द्रव्य जो बलकारक, वाजीकारक, वीर्य वर्धक हो।
  4. शोथहर: द्रव्य जो शोथ / शरीर में सूजन, को दूर करे।
  5. रसायन: द्रव्य जो शरीर की बीमारियों से रक्षा करे और वृद्धवस्था को दूर रखे।

राजवैद्य रसायन वटी के लाभ/फ़ायदे Benefits of Rajvaidya Rasayan Vati

  1. इसमें केवांच, गोखरू, मुस्ली, अश्वगंधा, शिलाजीत जैसे द्रव्य हैं जो की पुरुषों के विशेष रूप से उपयोगी माने गए हैं।
  2. यह यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायक है।
  3. यह नसों को ताकत देती है। इसके सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है।
  4. यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, अनैच्छिक शुक्रपात, स्वप्नदोष में लाभप्रद है।
  5. यह शारीरिक दुर्बलता को करती है।
  6. यह वीर्य की मात्रा को बढ़ाती है।
  7. यह शुक्राणुओं की संख्या बढाती है।
  8. इसके सेवन से खून की कमी दूर होती है।
  9. यह टेस्टोस्टेरोन के लेवल को बढ़ाती है।
  10. इसमें आम पाचन गुण है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मददगार है।
  11. यह प्राकृतिक कामोद्दीपक या वाजीकारक है।

राजवैद्य रसायन वटी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Rajvaidya Rasayan Vati

  1. एनर्जी, स्टैमिना की कमी General Physical Weakness, Prostration and fatigue, Neurasthenia
  2. अवसाद Depression, nervousness, palpitations
  3. एंग्जायटी Anxiety, Irritability & sleeplessness
  4. शरीर की मांसपेशियों में दर्द Aches in the thighs and calf regions
  5. भूख न लगना loss of appetite and indigestion
  6. खून की कमी Anaemia
  7. असमय बुढ़ापा Premature old age syndromes
  8. पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए sexual disorders of male
  9. नपुंसकता, शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी impotency
  10. स्वप्न दोष Night fall, erectile dysfunction
  11. प्रमेह urinary disorders
  12. पुरुषों में यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए
  13. शरीर की कोशिकाओं की ताकत बढ़ाने के लिए
  14. शारीरिक कमजोरी, स्ट्रेस

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Rajvaidya Rasayan Vati

  1. 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  2. इसे दूध के साथ लें।
  3. इसे भोजन करने के बाद लें।
  4. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  2. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  3. दवा के सेवन के दौरान पित्तवर्धक और गरिष्ठ भोजन का सेवन न करें।
  4. कुलथी का सेवन शिलाजीत के सेवन के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए है की, कुलथी पथरी की भेदक है।
loading...

2 thoughts on “राजवैद्य रसायन वटी Rajvaidya Rasayan Vati Detail and Uses in Hindi

  1. I am diabetic feeling weakness also the capacity of doing routine work getting down comparatively. Can I take RASAYAN BATI. Please suggest.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*