पत्रांगासव Patrangasava Detail and Uses in Hindi

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पत्रांगासव, एक क्लासिकल आयुर्वेदिक दवा है। इसे भैषज्य रत्नावली के प्रदर रोगाधिकार से लिया गया है। इसका मुख्य घटक पतंगकाष्ठ है तथा यह दवाई मुख्य रूप से प्रदर रोगों में प्रयोग की जाती है। यह फरमेंटेड आयुर्वेदिक दवा, आसव है, और इसमें 5-10 प्रतिशत तक सेल्फ-जनरेटेड अल्कोहल होता है। यह एक गर्भाशय का टॉनिक है और प्रदर रोगों gynecological में उपयोगी है।

नीचे इस दवा के उपयोग, घटक, गुण, सेवनविधि, और मात्रा के बारे में जानकारी दी गयी है। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

  • संधर्भ: भैषज्यरत्नावली, रसायनरोगाधिकार
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आयुर्वेदिक आसव-अरिष्ट
  • मुख्य उपयोग: प्रदर रोग
  • दवा का अनुपान: गुनगुना जल
  • उपचार की अविधि: इसे २ सप्ताह से लेकर २ महीनों तक लिया जा सकता है
  • एक दिन में ली जा सकने वाली मात्रा: दिन में दो बार, 12 से 24 ml की मात्रा वयस्कों द्वारा ली जा सकती है

Patrangasava is a polyherbal Ayurvedic medicine used to treat several female disorders. It is given in treatment of menstrual disorders and white discharge. It is uterine tonic and gives strength to the reproductive organs of female.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

प्रदर रोग क्या हैं?

प्रदर रोग, स्त्रियों में पाए जाने वाला वह रोग है जिसमें योनि से आसामान्य स्राव होता है। यह दो प्रकार का होता है। एक श्वेत प्रदर और दूसरा रक्त प्रदर।

रक्त प्रदर

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आयुर्वेद में रक्त प्रदर Rakta Pradara (Abnormal uterine bleeding) उस रोग को कहा जाता है जिसमें गर्भाशय uterus से असामान्य रक्तस्राव bleeding होता है तथा शरीर में कमजोरी weakness, एनीमिया anemia और पीठ दर्द pain in lower back आदि की शिकायतें होती हैं। रक्त प्रदर में गर्भाशय से उत्पन्न रक्तस्राव योनि vagina द्वारा होता है।

रक्त प्रदर को मेडिकल टर्म में मेट्रोरेजिया Metrorrhagia के नाम से जाना जाता है। ग्रीक भाषा का शब्द मेट्रोरेजिया, दो शब्दों से मिल कर बना है, मेट्रा=गर्भाशय और रेजिया= अधिक मात्रा में स्राव; मेट्रोरेजिया का अर्थ है गर्भ से अधिक स्राव।

रक्त प्रदर में मेट्रोरेजिया के अतिरिक्त शामिल है, मासिक का बहुत दिनों तक जारी रहना prolonged flow of blood और मासिक में बहुत अधिक रक्त बहना excessive blood flow जिसे मेडिकल टर्म में मेनोरेजिया menorrhagia कहा जाता है। असल में रक्त प्रदर वह रोग है जिसमें गर्भाशय से असामान्य रूप से खून का स्राव होता है।

सामान्य मासिक धर्म चक्र हर 22 से 35 दिन पर होते हैं तथा इनमे रक्तस्राव 3 से 7 दिनों तक रहता है। ज्यादातर स्राव शुरू के तीन दिन ही रहता है और फिर कम हो कर बंद हो जाता है। सामान्य माहवारी में करीब 35 मिलीलीटर फ्लो होता है।

लेकिन मेनोरेजिया/अत्यार्तव में प्रत्येक मासिक धर्म चक्र में करीब 80 मिलीलीटर या उससे भी अधिक रक्त की हानि होती है। मेट्रोरेजिया में गर्भाशय से कभी भी खून बहता है। मेनोरेजिया और मेट्रोरेजिया, दोनों ही स्थितियों में शरीर से ज्यादा खून की हानि से अनीमिया हो जाता है इसलिए इनका उपचार कराना आवश्यक है।

श्वेत प्रदर या लिकोरिया

श्वेत प्रदर या लिकोरिया एक स्त्री रोग है जिसे आम भाषा में सफ़ेद-पानी या वाइट डिस्चार्ज white discharge कहा जाता है। आयुर्वेद में यह प्रदर का एक प्रकार है जिसे श्वेत प्रदर कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे कफ रोग कहा गया है जो प्रायः कमजोर स्त्रियों में देखा जाता है। श्वेत प्रदर में योनी से असामान्य स्राव abnormal discharge होता है।

सामान्य रूप से normally योनी से हमेशा म्यूकस डिस्चार्ज mucous discharge होता है जो की सर्विकल, एंडोमिट्रियल ग्लैंड तथा अच्छे बैक्टीरिया के कारण होता है। सामान्य स्राव में योनी से निकलने वाला पदार्थ सफ़ेद या पानी जैसा होता है। इसमें कोई बदबू नहीं होती। यह केवल ओवूलेशन ovulation, प्रेगनेंसी pregnancy या सेक्स sexual arousal के दौरान ही ज्यादा मात्रा में निकलता है। बाकी समय यह काफी कम मात्रा में निकलता है। योनी से होने वाला सामान्य स्राव, जनन अंगों की सफाई cleaning, और स्नेहन lubrication करता है। यह स्राव योनीको इन्फेक्शन से भी बचाता है। लिकोरिया में होने वाला स्राव अलग होता है।

पत्रांगासव के घटक Ingredients of Patrangasava

  • पतंग काष्ठ Patranga Caesalpinia sappan 48 grams
  • खैरसार Khadira Acacia catechu 48 grams
  • वासामूल Vasa Adhatoda vasica 48 grams
  • सेमल के फूल Salmali Salmalia malabaricum 48 grams
  • बला Bala Sida cordifolia 48 grams
  • भिलावा Bhallataka Semecarpus anacardium 48 grams
  • गुडहल की कली Japakusuma Hibiscus rosasinensis 48 grams
  • सारिवा Sariva Hemidesmus indicus 48 grams
  • आम की गुठली की मींगी Amra Bija Mangifera indica 48 grams
  • दारुहल्दी Daruhaldi Berberis aristata 48 grams
  • रसोंत Daruhaldi Berberis aristata 48 grams
  • चिरायता Kiratatikta Swertia chireta 48 grams
  • सफ़ेद जीरा Shvet Jeeraka Cuminum cyminum 48 grams
  • बिल्व Bilva Aegle marmelos 48 grams
  • भांगरा Bringraja Eclipta alba 48 grams
  • दालचीनी Twak Cinnamon Cinnamomum zeylanicum 48 grams
  • केशर Kesar Crocus sativus 48 grams
  • लौंग Laung Clove Syzigium aromaticum 48 grams
  • लौह भस्म Lauha Bhasma 48 grams
  • द्राक्षा Draksha 960 g
  • धातकी Dhataki pushpa 768 g
  • पानी Water 24।576 liter
  • चीनी Sharkara Sugar 4।8 kg
  • शहद Madhu Honey 2।4 kg

भैषज्य रत्नावली में इसमें पोस्ता के डोडे भी डालने को लिखा गया है।

दवा के औषधीय कर्म

  • रक्तप्रदरहर: द्रव्य जो रक्त प्रदर की समस्या को दूर करे।
  • एंटीइन्फ्लेमेटरी: Anti-inflammatory सूजन को कम करना।
  • आक्षेपनाशक: Antispasmodic अनैच्छिक पेशी की ऐंठन से राहत देना।
  • वातहर: द्रव्य जो वातदोष निवारक हो।
  • श्वेतप्रदरहर: द्रव्य जो सफ़ेद पानी की समस्या को दूर करे।
  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • रक्तस्तंभक: Styptic
  • गर्भस्थापना: जो गर्भ की स्थापना में मदद करे।
  • पाचन: द्रव्य जो आम को पचाता हो लेकिन जठराग्नि को न बढ़ाये।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • शोधक: द्रव्य जो शरीर की गंदगी को मुख द्वारा या मलद्वार से बाहर निकाल दे।

पत्रांगासव के लाभ/फ़ायदे Benefits of Patrangasava

  1. यह पाचक है।
  2. यह खून से गंदगी हटाता है blood purifier है।
  3. इसका एसट्रिनजेंट astringent गुण ब्लीडिंग डिसऑर्डर में लाभकारी है।
  4. इसके सेवन से रोजोविकर/मासिक धर्म menstrual disorders के विकारों में लाभ होता है।
  5. यह एक गर्भाशय का टॉनिक uterine tonic है और गर्भाशय को बल देता है।
  6. यह इनफर्टिलिटी infertility में भी लाभप्रद है।
  7. इसके सेवन से पीरियड के दौरान होने वाले दर्द से राहत होती है।

पत्रांगासव के चिकित्सीय उपयोग Uses of Patrangasava

  1. स्त्रियों के प्रदर रोग (श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर)
  2. मासिक धर्म रोग जैसे की बहुत अधिक स्राव, अनियमित स्राव, दर्द आदि
  3. श्वेतप्रदर / सफ़ेद पानी की समस्या /योनि से सफ़ेद पानी जाना

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Patrangasava

  1. यह आयुर्वेद का अरिष्ट है और इसे लेने की मात्रा 12-24 मिलीलीटर है।
  2. दवा को पानी की बराबर मात्रा के साथ-साथ मिलाकर लेना चाहिए।
  3. इसे सुबह नाश्ते के बाद और रात्रि के भोजन करने के बाद लें।
  4. इसे भोजन के 30 मिनट में बाद, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  5. इस दवा को 1-2 महीने तक लें।
  6. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें। कुछ मामलों में इसे दिन में तीन बार भी लिया जाता है। लिकोरिया में इसे २ सप्ताह तक दिन में तीन बार लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  2. इसे निर्धारित मात्रा में लें।
  3. इसे खाली पेट न लें।
  4. इसमें गुड़, शहद, द्राक्षा है इसलिए डायबिटीज में इसका सेवन न करें।
  5. इसमें 5-10% self-generated अल्कोहल है।
  6. नियमित व्यायाम करें।
  7. गर्भावस्था में कोई दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।

उपलब्धता

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

  1. बैद्यनाथ Baidyanath Patrangasava
  2. डाबर Dabur Patrangasava
  3. महर्षि आयुर्वेद Maharishi Ayurveda Patrangasava
  4. पतंजलि Divya Patrangasava
  5. तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।
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