करकादि चूर्ण Karkadi Churna Detail and Uses in Hindi

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करकादि चूर्ण, एक आयुर्वेदिक हर्बल चूर्ण है जिसे पाचन सम्बन्धी परेशानियों में प्रयोग किया जाता है। सनाय के प्रमुखता होने से इसका का मुख्य गुण विरेचन है और इसलिए यह कब्ज़ में लाभप्रद है। सनाय के अतिरिक्त इसमें करक (अर्थात अनार), जीरा, त्रिफला आदि द्रव्य भी है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • निर्माता / ब्रांड: Sethi Rasayan Shala
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवाई
  • मुख्य उपयोग: विबंध
  • मुख्य गुण: विरेचक

करकादि चूर्ण के घटक Ingredients of Karkadi Churna

  1. करक / अनार के बीज
  2. सफ़ेद जीरा 1 तोला
  3. काला नमक 1 तोला
  4. सूखा पुदीना 1 तोला
  5. आंवला 1 तोला
  6. हरद 1 तोला
  7. बहेड़ा 1 तोला
  8. सेंधा नमक 1 तोला
  9. साम्भर नमक 1 तोला
  10. शुंठी 1 तोला
  11. सनाय 10 तोला

बनाने की विधि

  1. सभी घटक द्रव्यों को निर्धारित मात्रा में लें।
  2. इनका कपड़छन चूर्ण बना लें।
  3. चूर्ण को मिला लें और एक शीशी में भर कर रख लें।
  4. इस प्रकार तैयार चूर्ण को करकादि चूर्ण कहते हैं।

जानिये प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के बारे में

1- अनार को आयुर्वेद में करक, दाडिम्ब, सुफल, वृत्तफल, कुचफूल, मणिबीज और शुकादन आदि नामों से जानते है। अनार के सूखे बीजों को अनारदाना कहते है और यह एक मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है। इसके सेवन से भूख बढ़ती है।

2- सनाय का लैटिन नाम या वानस्पतिक नाम केसिया अंगस्टीफोलिया है और यह लेगुमिनेसी कुल का बहुवर्षीय पौधा है। इसे हिन्दी में सनाय, अंग्रेजी में इंडियन सेन्ना, राजस्थानी में सोनामुखी कहते हैं। सनाय का पौधा काँटे रहित व झाड़ीनुमा होता है जिसकी ऊँचाई 2 से 4 फुट तथा शाखायें टेढ़ी मेढ़ी होती हैं। शीतकाल में चमकीले पीले रंग के फूल खिलते हैं। इसकी फली हल्के रंग की होती है व पकने पर गहरे भूरे रंग की हो जाती है। बीज भी भूरे रंग के होते हैं।

यह बंजर भूमि में उगता है तथा इसके पौधे को कोई पशु नहीं खाता। एक बार लगा दिए जाने पर कई वर्षों तक इसका औषधीय प्रयोग किया जा सकता है।

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सनाय मुख्य रूप से रेचक और दस्तावर है और इसलिए इसे प्रमुखता से विबंध / कब्ज़ को दूर करने के दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसे अन्य बहुत से रोगों जिए की चर्म रोगों, पीलिया, अस्थमा, मलेरिया, बुखार, अपच आदि में भी प्रयोग किया जा रहा है।

3- त्रिफला तीन प्राकृतिक जड़ी बूटियों (आवला, हरड और बहेड़ा) का एक कॉम्बिनेशन है। इसके सेवन से immunity बढती है तथा पाचन ठीक रहता है। यह रसायन होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छा विरेचक, दस्तावर भी है। इसके सेवन से पेट सही से साफ़ होता है, शरीर से गंदगी दूर होती है और पाचन सही होता है। यह पित्त और कफ दोनों ही रोगों में लाभप्रद है। त्रिफला प्रमेह, कब्ज़, और अधिक पित्त नाशक है। यह पूरे शरीर को साफ़ करता है और फर्टिलिटी को बढाता है।

4- अदरक का सूखा रूप सोंठ या शुंठी dry ginger is called Shunthi कहलाता है। एंटी-एलर्जी, वमनरोधी, सूजन दूर करने के, एंटीऑक्सिडेंट, एन्टीप्लेटलेट, ज्वरनाशक, एंटीसेप्टिक, कासरोधक, हृदय, पाचन, और ब्लड शुगर को कम करने गुण हैं। यह खुशबूदार, उत्तेजक, भूख बढ़ाने वाला और टॉनिक है। सोंठ का प्रयोग उलटी, मिचली को दूर करता है।

शुण्ठी पाचन और श्वास अंगों पर विशेष प्रभाव दिखाता है। इसमें दर्द निवारक गुण हैं। यह स्वाद में कटु और विपाक में मधुर है। यह स्वभाव से गर्म है।

करकादि चूर्ण के लाभ/फ़ायदे Benefits of Karkadi Churna

यह मलावरोध को दूर करता है। मलावरोध प्रायः लीवर के ठीक से काम न करने, पाचन की कमजोरी, या किसी अन्य कारण से हो सकता है। मलावरोध के कारण अन्य बहुत से लक्षण उत्पन्न हो जाते है जैसे की अफारा, भूख न लगना, सही से पदार्थों का अवशोषण न होना आदि। ऐसे में इस चूर्ण के सेवन से लाभ होता है।

  1. यह आँतों की सफाई करता है।
  2. मलावरोध के दूर होने से लीवर रोगों में लाभ होता है।
  3. यह शरीर से दूषित पदार्थों को दूर करता है।

करकादि चूर्ण के चिकित्सीय उपयोग Uses of Karkadi Churna

इस चूर्ण के सेवन से कब्ज़ दूर होता है तथा पेट साफ़ होता है। यह यकृत जिसे अंग्रेजी में लीवर कहते हैं, के रोगों में भी लाभप्रद है।

विबंध / कब्ज़ / मलावरोध

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Karkadi Churna

  1. इस चूर्ण को लेने की मात्रा एक से तीन माशा अथवा एक से तीन ग्राम है।
  2. इसे रात्रि में एक बार सोने से पहले ही लेना है।
  3. इस दवा के लिए अनुपान उष्ण / गर्म पानी है।
  4. इसे भोजन करने के बाद लें।

सावधनियाँ / साइड-इफेक्ट्स / कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

इस दवा का मुख्य घटक सनाय है। सनाय को आंत्र रुकावट, पेट में अज्ञात कारणों के दर्द, पथरी, कोलाइटिस, Crohn’s disease, IBS, बवासीर, नेफ्रोपैथी, प्रेगनेंसी और १२ वर्ष से छोटे बच्चों में न प्रयोग करे।

  1. अधिक मात्रा में प्रयोग से दस्त हो सकते हैं।
  2. दस्त होने पर इसे इस्तेमाल न करें।
  3. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  4. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  5. इसमें लवण हैं इसलिए इसका सेवन वे लोग न करें जिन्हें उच्च रक्तचाप है या कम नमक के सेवन की सलाह दी गई है।
  6. यह उष्ण वीर्य है इसलिए इसका सेवन गर्भवस्था में न करें।
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