हिमालया गोक्षुरा Himalaya Gokshura Detail and Uses in Hindi

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हिमालया गोक्षुरा, हिमालया ड्रग कम्पनी द्वारा निर्मित दवाई है जिसमें गोखरू का प्यूर हर्बल एक्सट्रेक्ट है। यह दवा मुख्य रूप से पुरुषों के लिए है और उनके यौन स्वास्थ्य को बेहतर करती है।

इस दवा का एकमात्र घटक गोखरू है जो उत्तम वाजीकारक, बृहण, वृष्य, शक्तिवर्धक, बलवर्धक, अग्निदीपक, मधुर, स्वादु, शीतल और रसायन है। गोखरू बढ़े वात-पित्त-कफ को दूर करता है। यह प्रमेहरोग नाशक है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Himalaya Gokshura contains pure extract of Tribulus terrestris and is indicated in erectile dysfunction, urinary problems and as an aphrodisiac.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • निर्माता / ब्रांड: हिमालया ड्रग कंपनी
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल
  • मुख्य उपयोग: इरेक्टाइल डिसफंक्शन
  • मुख्य गुण: मूत्रल, वाजीकारक, वृष्य

मूल्य MRP: Himalaya Herbals Gokshura – 60 Capsules @ Rs.150.00 (दवा के दाम बदल सकते हैं)

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हिमालया गोक्षुरा के घटक Ingredients of Himalaya Gokshura

प्रत्येक गोली में गोखरू (Tribulus terrestris) के फल के एक्सट्रेक्ट – 250mg

गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है।

गोखरू दो प्रकार का होता है, छोटा और बड़ा। छोटे गोखरू का वानस्पतिक नाम ट्राईब्यूलस टेरेस्ट्रिस है। इसके पत्ते देखने में एकदम चने के पत्ते जैसे लगते है तथा इस पर पीले पुष्प आते हैं। इसके फल कांटे दार होते है और इन्हें त्रिकंटक भी कहा जाता है। क्योंकि यह फल कांटेदार होने के कारण गौ के खुरों में फंस जाते हैं इसलिए यह गोखरू कहलाते हैं।

गोखरू आयुर्वेद में मुख्य रूप से पुरुषों के लिए प्रयोग की जाने वाली औषधि है। इसके सेवन से मांसपेशियां बनती हैं, मज़बूत होती हैं, शक्ति-बल की वृद्धि होती है, टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है जिससे कामेच्छा बढ़ती है, वीर्य -शुक्र विकार दूर होते हैं और व्यक्ति हृष्ट-पुष्ट होता है।

गोखरू शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। यह पथरी, पुरुषों के प्रमेह, सांस की तकलीफों, शरीर में वायु दोष के कारण होने वाले रोगों, हृदयरोग और प्रजनन अंगों सम्बन्धी रोगों की उत्तम दवा है। यह वाजीकारक है और पुरुषों के यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

गोखरू का प्रयोग यौन शक्ति को बढ़ाने में बहुत लाभकारी माना गया है। यह नपुंसकता, किडनी/गुर्दे के विकारों, प्रजनन अंगों की कमजोरी-संक्रमण, आदि को दूर करता है।

गोखरू के आयुर्वेदिक गुण और कर्म

यह मधुर रस औषधि है। मुख में रखते ही प्रसन्न करता है। यह रस धातुओं में वृद्धि करता है। यह बलदायक है तथा रंग, केश, इन्द्रियों, ओजस आदि को बढ़ाता है। यह शरीर को पुष्ट करता है, दूध बढ़ाता है, जीवनीयआयुष्य है। मधुर रस, गुरु (देर से पचने वाला) है। यह वात-पित्त-विष शामक है।

यह शीत वीर्य है। वीर्य का अर्थ होता है, वह शक्ति जिससे द्रव्य काम करता है। आचार्यों ने इसे मुख्य रूप से दो ही प्रकार का माना है, उष्ण या शीत। शीत वीर्य औषधि के सेवन से मन प्रसन्न होता है। यह जीवनीय होती हैं। यह स्तम्भनकारक और रक्त तथा पित्त को साफ़ / निर्मल करने वाली होती हैं।

  • रस (taste on tongue): मधुर
  • गुण (Pharmacological Action): गुरु, स्निग्ध
  • वीर्य (Potency): शीत
  • विपाक (transformed state after digestion): मधुर

विपाक का अर्थ है जठराग्नि के संयोग से पाचन के समय उत्पन्न रस। इस प्रकार पदार्थ के पाचन के बाद जो रस बना वह पदार्थ का विपाक है। शरीर के पाचक रस जब पदार्थ से मिलते हैं तो उसमें कई परिवर्तन आते है और पूरी पची अवस्था में जब द्रव्य का सार और मल अलग हो जाते है, और जो रस बनता है, वही रस उसका विपाक है। यह मधुर रस और मधुर विपाक है।

मधुर विपाक, भारी, मल-मूत्र को साफ़ करने वाला होता है। यह कफ या चिकनाई का पोषक है। शरीर में शुक्र धातु, जिसमें पुरुष का वीर्य और स्त्री का आर्तव आता को बढ़ाता है। इसके सेवन से शरीर में निर्माण होते हैं।

कर्म Principle Action

  1. मूत्रल : द्रव्य जो मूत्र ज्यादा लाये।
  2. मूत्रकृच्छघ्न: द्रव्य जो मूत्रकृच्छ strangury को दूर करे।
  3. शीतल: स्तंभक, ठंडा, सुखप्रद है, और प्यास, मूर्छा, पसीना आदि को दूर करता है।
  4. वातहर: द्रव्य जो वातदोष निवारक हो।
  5. शुक्रकर: द्रव्य जो शुक्र का पोषण करे।
  6. बाजीकरण: द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करे।
  7. वृष्य: द्रव्य जो बलकारक, वाजीकारक, वीर्य वर्धक हो।
  8. अश्मरीघ्न: द्रव्य जो पथरी नष्ट करे।
  9. बल्य: द्रव्य जो बल दे।
  10. रक्तशोधन: द्रव्य जो खून साफ़ करे।
  11. शुक्रशोधन: द्रव्य जो शुक्र क शोधन करे।
  12. बस्तीशोधन: द्रव्य जो मूत्रल अंगों को साफ़ करे।
  13. वातहर: द्रव्य जो वायु दोष दूर करे।

हिमालया गोक्षुरा के लाभ/फ़ायदे Benefits of Himalaya Gokshura

  1. यह शरीर को ठंडक देता है।
  2. यह मूत्रल है।
  3. इसके सेवन से पेशाब सम्बन्धी रोगों में लाभ होता है।
  4. यह टेस्टोस्टेरोन के लेवल को बढ़ाता है।
  5. यह प्रजनन अंगों के सही काम करने में मदद करता है।
  6. यह मांसपेशियों के विकास में मदद करता है।
  7. यह स्टैमिना, एनर्जी को बढ़ाता है।
  8. इसके सेवन से सेक्सुल प्रदर्शन में सुधार होता है।
  9. यह वाजीकारक है और कामेच्छा को बढ़ाता है।
  10. यह शरीर को मज़बूत बनाता है।

हिमालया गोक्षुरा के चिकित्सीय उपयोग Uses of Himalaya Gokshura

  1. स्तम्भन दोष ED, performance problem
  2. कम एनर्जी, कम कामेच्छा Low energy, vigour
  3. पेशाब रोग Urinary tract infection UTI
  4. वीर्य दोष Semen disorders (too few sperms / oligospermia or no sperms azoospermia or defects in sperm quality)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Himalaya Gokshura

  • इस दवा की 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे पानी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  2. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  3. गोखरू का मूत्रल गुण है जिससे पेशाब ज्यादा आता है।
  4. दवा के सेवन का असर कुछ सप्ताह के प्रयोग के बाद आता है।
  5. दवा के किसी भी दुष्प्रभाव के बारे में ज्ञात नहीं है।
  6. यदि आपको इसके सेवन के दौरान किसी भी प्रकार का साइड-इफेक्ट लगे या यह आपको सूट न करे तो कृपया इसे न लें।
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