चित्रक हरीतकी Chitrak Haritaki Detail and Uses in Hindi

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चित्रक हरीतकी, एक आयुर्वेदिक हर्बल दवा है जिसे भैषज्य रत्नावली के नासारोगाधिकार से लिया गया है। यह कफ विकारों की उत्तम दवा है। इसके सेवन से पाचन तन्त्र पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह मन्दाग्नि को दूर करने वाली और कफघ्न औषधि है। चित्रक हरीतकी में मुख्य घटक चित्रक, हरीतकी, दशमूल, गिलोय, आंवला, त्रिकटु है। गिलोय, आमला, दशमूल रसायन हैं जो की शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते है। त्रिकटु और चित्रक शरीर से आमदोष को दूर करते है। यह दवा कृमिनाशक भी है।

चित्रक हरीतकी, एक अवलेह है। अवलेह या लेह्य वे दवाएं हैं जो की औषधियों के क्वाथ, रस, फाँट, आदि का पाककर बनायी जाती है तथा शर्करा, गुड़, शहद या अल्प प्रक्षेप डालने से यह चाटने योग्य बन जाती हैं। आयुर्वेद में लेह या अवलेह को लेने की मात्रा 6-24 gram बताई गई है। किन्तु अवलेह की सही खुराक, व्यक्ति की उम्र, बल, रोग और पाचन शक्ति पर निर्भर करती है। अल्पबल और कमज़ोर पाचन में तो इसे १ तोला तक ही लिया जाए तो सही है।

Chitrak Haritaki is an herbal Ayurvedic medicine. It is indicated in chronic respiratory ailments. Chitrak Haritaki Avaleha / Lehya, boosts immunity. It is an excellent medicine to treat recurrent cold-cough. It is taken in dose of 6 grams by licking, followed by one glass lukewarm cow\’s milk.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language।

चित्रक हरीतकी के घटक Ingredients of Chitrak Haritaki

  • चित्रक Chitraka kvatha Plumbago zeylanica Rt. 4.800 l
  • आंवला Amalaki Kvatha Phyllanthus emblica (Emblica officinalis) P. 4.800 l
  • गुडूची Guduchi Kvatha Tinospora cordifolia St. 4.800 l
  • दशमूल काढ़ा Dashamula Kvatha 4.800 l
  • हरीतकी Haritaki Churna Terminalia chebula P. 3.07 kg
  • गुड़ Guda Jaggery 4.80 kg
  • सोंठ Shunti Zingiber offichinale Rz. 96 g
  • काली मिर्च Maricha Piper nigrum Fr. 96 g
  • पिप्पली Pippali Piper longum Fr. 96 g
  • दालचीनी Tvak Cinnamomum zeylanicum St. Bk. 96 g
  • इलाइची Ela (Suksmaila) Elettaria cardamomum Sd. 96 g
  • तेजपत्ता Patra (Tejapatra) cinnamomum tamala Lf. 96 g
  • यव क्षार Ksara (Yava) Hordeum vulgare Water soluble ash of plant. 24 g
  • मधु Madhu Honey 384 g

चित्रक / चित्रा / चित्रमूलम / Plumbago zeylanica पूरे देश में पाया जाना वाला झाड़ीनुमा पेड़ है। आयुर्वेद, में इस पौधे की जड़ को उदर के रोगों और श्वसन रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। चित्रक स्वभाव से गर्म है। यह वातहर और कफहर है। यह संग्रहणी, त्वचा रोग, सूजन, बवासीर, कृमि, खांसी, उल्टी, पेट में दरद, गुदा में सूजन, बुखार आदि को नष्ट करता है। यह त्रिदोषनाशक और आमपाचक है।

हरीतकी को बहुत से नामों जैसे की हरड़, पथ्य, शिव, अभया और विजया नाम से जाना जाता है। यह पेट के रोगों के लिए बहुत अच्छी दवा है। हरीतकी त्रिदोषहर रसायन है। इसमें लवण रस छोड़ कर सभी रस पाए जाते है। गुणों में यह लघु और रुक्ष है। यह स्वभाव से गर्म है। यह शरीर की सभी धातुओं पर काम करती है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से पाचन, उत्सर्जन, नर्वस और श्वसन अंगों पर देखा जा सकता है। हरीतकी विरेचक, संकोचक, कृमिनाशक, कफ को ढीला करने वाली और टॉनिक है।

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हरीतकी का सेवन शरीर में विषम ज्वर, दर्द, उदर रोग, अपच, कब्ज़, कृमि आदि दूर होते है। यह श्वसन रोगों को भी दूर करने वाली है। यह ब्रोंकाइटिस, पुराने अस्थमा, कफ रोगों में भी बहुत प्रभावी है।

त्रिकटु सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली का संयोजन है। यह आम दोष (चयापचय अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों), जो सभी रोग का मुख्य कारण है उसको दूर करता है। यह बेहतर पाचन में सहायता करता है और कब्ज करता है। यह यकृत को उत्तेजित करता है। यह तासीर में गर्म है और कफ दोष के संतुलन में मदद करता है।

दशमूल दस जड़ों और छाल का संयोजन है। इसके काढ़े को कफ और वात विकारों का इलाज करने के लिए दिया जाता है। यह सूजन को दूर करने की उत्तम औषधि है। यह आमपाचक है और अस्थमा, बुखार और दर्द में राहत देता है। यह एक टॉनिक है।

तेजपत्ता, एक पेड़ के सूखे परिपक्व पत्ते होते हैं। यह तासीर में गर्म तथा कफ-और वातहर होते हैं । तेजपत्ते का सेवन पित्त को बढ़ाता है। यह कड़वा, मीठा, सुगंधित, कृमिनाशक, मूत्रवर्धक, वातहर और सूजन दूर करने वाला है। यह रक्त को साफ़ करता है, भूख और पाचन को सुधारता है। इसे खांसी, सर्दी, मतली, उल्टी, गैस और अपच के उपचार के लिए आयुर्वेद में उपयोग किया जाता है।

आंवला एक पोषक टॉनिक है। यह विटामिन सी से भरपूर होता है और इम्युनिटी को बढ़ाता है। इसके सेवन से बाल काले रहते हैं, कफ रोग दूर होते है और बार-बार होने वाले इन्फेक्शन दूर होते हैं। आंवले गुण में गुरु, रूक्ष, स्वाद में मधुर, अम्ल, कटु, तिक्त और कषाय, वीर्य में शीत और मधुर विपाक है। इसमें कुल छः में पांच रस हैं और इस कारण यह तीनों ही दोषों को संतुलित करता है। यह एक रसायन है जो रोगों को दूर करता है।

यह मूत्रल, संकोचक, विरेचक, वातहर, पित्तहर है। यह शरीर की गर्मी और पित्त विकार को दूर करता है। यह ब्लीडिंग डिसऑर्डर / रक्तपित्त, पेट के अल्सर, एसिडिटी, अपच आदि को दूर करने वाला है। यह कफ रोगों को भी दूर करता है और संक्रमणों से शरीर की रक्षा करता है।

इला / इलायची, के बीज त्रिदोषहर, पाचक, वातहर, पोषक, विरेचक और कफ को ढीला करने वाला है। यह मूत्रवर्धक है और मूत्र विकारों में राहत देता है। इलाइची के बीज अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गले के विकार, बवासीर, गैस, उल्टी, पाचन विकार और खाँसी में उपयोगी होते हैं।

चित्रक हरीतकी के लाभ/फ़ायदे Benefits of Chitrak Haritaki

  1. यह नाक के रोगों, बार-बार होने वाले जुखाम, खांसी, अस्थमा की उत्तम दवा है।
  2. यह कृमि रोग से भी राहत देता है। बहुत बार शरीर में कृमि होने पर भी शरीर में बहुत अधिक कफ बनता है।
  3. यह भूख न लगना, अपच, अर्श आदि में लाभकारी है।
  4. यह मन्दाग्नि को दूर करता है।
  5. यह शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता है।
  6. यह पुराने और बिगड़े हुए जुखाम की उत्तम दवाई है।

चित्रक हरीतकी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Chitrak Haritaki

  1. सर्दी-जुखाम
  2. पिनासा Pinasa (Chronic rhinitis/Sinusitis)
  3. कास Kasa (cough)
  4. श्वास Shvasa (Dyspnea)
  5. गुल्म Gulma (abdominal lump)
  6. गैस का ऊपर की तरफ चढ़ना (upward movement of gases)
  7. अर्श Arsha (Piles)
  8. अग्निमांद्य Agnimandya (loss of appetite)
  9. क्षय Kshaya (Phthisis)
  10. कृमि Krimi (Helminthiasis / worm infestation)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Chitrak Haritaki

  1. 6 gram दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  2. इसे दूध के साथ लें।
  3. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।
  4. इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

This medicine is manufactured by Baidyanath (Chitrak Haritaki), Dabur (Chitrak Haritaki), Maharshi Ayurveda (Chitrak Haritaki), Sri Sri Ayurveda (Chitrakaharitaki Lehya), Nagarjun (Chitrak Haritaki Avaleh), Nisarg (Chitrak Haritaki Avaleha) and many other Ayurvedic pharmacies.

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