तेजपत्ता (Tej Patta) Bay leaf in Hindi

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तेजपत्ता हर भारतीय रसोई में हमेशा मौजूद रहता है। इसका प्रयोग मुख्यतः तड़के के रूप में भोजन का स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए किया जाता है। तेजपत्ते के छौंक कड़ी, सब्जी, पुलाव आदि के लिए तो आवश्यक ही है। लेकिन तेजपत्ता, जो की आजकल केवल मसाले मात्र की तरह प्रयोग होता है वह असल में एक औषधि भी है। और वैसे भी हम जितने भी मसाले अपने भारतीय भोजन में प्रयोग करते है, वे सभी औषधीय गुणों से युक्त हैं और उनका प्रयोग भोजन में उसे सुपाच्य बनाने के लिए ही किया जाता है।

bay leaf medicinal uses

तेजपत्ता को आयुर्वेद में दवाई की तरह प्रयोग किया जाता है। इसे अन्य जड़ीबूटियों के साथ आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए इस्तेमाल करते है, जैसे की चित्रकादि तेल, कसिसादि तेल, वज्रक तेल, अरक्कू तैलम आदि। इसे यूनानी और सिद्ध में भी दवा हेतु प्रयोग किया जाता है।

ग्रीस और रोम इसे, इसके रोग ठीक कर देने के गुण के कारण पवित्र माना जाता है। पुराने समय में रोम में इसके पत्तों का असमय गिरना अपशकुन माना जाता था। पुराने ग्रीस में इसके पत्तों से बना हुआ ताज विजताओं को पहनाया जाता था।

आयुर्वेद में इसे पत्र, तमालपत्र, पात्रवाचक, त्वकपत्र आदि नामों से जानते हैं। सिद्ध में इसे तलिसपत्री, लावंगपत्री Ilavankappaththiri और यूनानी में सलीखा, साज़जे हिंदी Saleekhaa, Saazaj Hindi के नाम से जाना जाता है। लैटिन में यह सिनामोमम टमाला और इंग्लिश में बे लीफ या फ़ोलिया मालावाथी कहलाता है। यह कर्पूर कुल का पेड़ है।

ज्यादातर भारतीय भाषाओं में यह तेजपत्ता ही कहा जाता है।

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तेजपत्ते का पेड़, छोटा सदाबहार evergreen tree वृक्ष है जिसकी ऊंचाई 7.5 मीटर तक की हो सकती है। यह उष्णकटिबंधीय tropical, उप उष्णकटिबंधीय subtropical हिमालय (मुख्यतः ठन्डे उत्तरी भारत में) में 900 से 2300 मीटर की ऊंचाई के बीच प्राकृतिक रूप से मिलता है। इसे बीजों से नर्सरी में बोया जाता है और बाद में उपयुक्त जगह लगाया जाता है। पत्तों को दस साल के ऊपर के पेड़ों से शुष्क मौसम में एकत्रित किया जाता है। तेजपत्ते के हरे पत्तों में अच्छी सुगंध आती है। पेड़ की छाल भूरे-पीले रंग की और फूल सफ़ेद होते हैं। वैशाख के महीने में पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों के पेड़ों के पत्तों में अधिक सुगंध और तीक्ष्णता पायी जाती है।

स्थानीय नाम

  1. Latin: Cinnamomum tamala
  2. Assamese : Tejpat
  3. Bengali : Tejpatra, Tejpata
  4. English : Indian cinnamon
  5. Gujrati : Tamala patra, Develee
  6. Hindi : Tejpatra
  7. Kannada : Tamalapatra, Dalchini ele
  8. Kashmiri : Dalchini pan, Tajpatra
  9. Malayalam : Karuvapatta patram
  10. Marathi : Tamalpatra
  11. Oriya : Tejapatra
  12. Punjabi : Tajpater
  13. Sanskrit : Tvaka patra, Varanga, Coca
  14. Telugu : Akupatri
  15. Urdu : Tezpat

उपयोगी अंग: पत्तियां, टहनियों की छाल

मुख्य योग: त्रिजात, चातुर्जात

वानस्पतिक कुल: लाऊरेसीएइ- कर्पूर कुल

यूनानी गुण: दूसरे दर्जे का गर्म और रूक्ष

संघटन: पत्तों में उड़नशील तेल पाया जाता है।

तमालपत्र के आयुर्वेदिक गुण और कर्म

तेजपत्ता मधुर, तीक्ष्ण, गर्म, चिपचिपा, हल्का, कफ – वायु, अरुचि, पाइल्स, जुखाम आदि को दूर करने वाला है। यह तासीर में गर्म Hot in potency है। यह विष, बस्ती के रोगों, पीनस और हल्लास में लाभप्रद है। यह दिल के रोगों, कफ, और अस्थमा में आराम पंहुचाता है। इसे वात और कफ रोगों में प्रमुखता से प्रयोग किया जाता है।

  1. रस (taste on tongue): मधुर, कटु,
  2. गुण (Pharmacological Action): लघु, पिच्छिल, तीक्ष्ण
  3. वीर्य (Potency): उष्ण
  4. विपाक (transformed state after digestion): कटु
  5. कर्म Action of Bay leaf
  6. कफ-वात हर: कफ और वायु दोष को संतुलित करना
  7. रुच्य: भोजन में स्वाद बढ़ाना
  8. अर्शोघ्न: अर्श / पाइल्स को दूर करना
  9. वातानुलोमना: वायु को नीचे ले जाना
  10. मस्तिष्कबलदायक
  11. मूत्रजनन
  12. अमाशयबल दायक

तेजपत्ते के स्वास्थ्य लाभ / फायदे Health benefits of Bay leaf / Taj patta in Hindi

  1. तेजपत्ते में विटामिन ए, विटामिन सी, मैग्नीशियम, कैल्शियम, और लोहा पाया जाता है।
  2. यह एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल antibacterial, antifungal है।
  3. यह अस्थमा, कफ रोगों में लाभप्रद है।
  4. यह फ्लू, सर्द-खासी के लक्षणों को दूर करता है।
  5. सर्दी के बुखार में इसकी चाय bay leaf tea बनाकर दिन में २-३ बार पीने से लाभ होता है।
  6. यह दर्द-सूजन में राहत देता है।
  7. यह मधुमेह रोधी anti-diabetic है।
  8. यह हृदय रोगों prevent cardiovascular diseases से बचाव करता है।
  9. यह खून को साफ़ करता detoxify है।
  10. यह शरीर से अमा दोष Ama Dosha को दूर करता है। अमा दोष का मतलब है meaning of Ama Dosha जब मन्दाग्नि होती है तो भोजन पूरा नहीं पच पाता और बिना पचा सड़ता हुआ भोजन, शरीर में दूषित पदार्थ बनाता है। यही अमा दोष है। यह दोष खून को दूषित करता है और फिर तीनों दोषों को।
  11. यह पाचन तन्त्र के लिए अच्छा है और भूख को बढ़ाता है।
  12. यह पाचक रसों के स्राव में मदद करता है stimulates digestive juices जिससे पाचन बेहतर होता है।
  13. यह अपच indigestion, पेट में दर्द abdominal pain, गैस gas, उलटी vomiting और जी मिचलाना nausea को दूर करता है।
  14. इसमें सूजन को दूर करने के गुण हैं। इसके पत्तों के तेल को स्प्रेन, मोच, आर्थराइटिस, रुमेटिज्म, दर्द पर लगाने से आराम मिलता है।

तेजपत्ते के औषधीय प्रयोग Medicinal Uses of Bay leaf in Hindi

  1. सर्दी-जुखाम, छींके, नाक बहना, नाक में जलन, स्वाद न आना आदि में तेजपत्ते की चाय पीने से बहुत लाभ होता है। तेजपत्ते के चाय बनाने के लिए how to make bay leaf tea in Hindi, करीब 3 ग्राम तेजपत्ते के चूर्ण को 200 ml पानी में उबालें। जब पानी 100 ml हो जाए तो इसमें थोड़ा दूध और शहद या चीनी डाल कर पिए।
  2. तेज पत्ते का काढ़ा (5 ग्राम की मात्रा को एक गिलास पानी में उबालें जब तक की पानी एक चौथाई न रह जाये) Bay leaf decoction पीने से सर्दी वाला बुखार दूर होता है।
  3. तेज पत्र को पानी में उबाल कर पीने से आँतों की खराबी, पेट फूलना, दस्त आदि दूर होते हैं।
  4. उलटी, उबकाई आने पर इसके पत्ते का चूर्ण कुछ मात्रा में फांक कर लेना चाहिए।
  5. पत्तों में संकोचक astringent गुण होता है। प्रसव के बाद इसका काढ़ा पीने से या चूर्ण खाने से खून आना कम होता है। यह नई माँ में दूध की मात्रा को बढ़ाता है और खून के दोष भी दूर करता है.
  6. सर्दी के कारण सर में होने वाले दर्द में, गर्म-पानी में पत्तों को पिस कर माथे-सिर पर लेप करें।
  7. अस्थमा में, तेजपत्ते के चूर्ण को एक गिलास दूध में उबाल कर शहद मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  8. दांतों पर पत्तों का चूर्ण मलने से दांत मजबूत होते हैं। इससे दांतों में कीड़े नहीं लगते।
  9. चावल / गेहूं / आटा आदि में कीड़े न लगें इसलिए रखने वाले बर्तन में तेजपत्ते की लेयर नीचे और ऊपर बिछा कर रखें।
  10. इसके पत्तों के पाउडर का ३० दिन तक प्रयोग मधुमेह में लाभप्रद है।
  11. औषधीय मात्रा Dosage of Tej patta for Medicinal Purpose
  12. तेजपत्ते की दवाई की तरह चूर्ण की लेने वाली मात्रा 1 से 3 ग्राम है।
  13. क्वाथ बनाने के लिए 3-5 ग्राम की मात्रा ली जा सकती है।

सावधानियाँ Warning / Caution / Side-effects

इसका अधिक मात्रा में सेवन न करें।

  1. यह स्वभाव से गर्म hot है और ज्यादा पसीना लाता है।
  2. यह तीक्ष्ण है और पेट में जलन कर सकता है।
  3. पेट के अल्सर में इसे न प्रयोग करें।
  4. गर्भावस्था में इसका सेवन दवा की तरह न करें।
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