अडूसा Malabar nut Information and Uses in Hindi

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अडूसा को संस्कृत में वासा, फारसी में रूस, और इंग्लिश में मालाबार-नट Malabar nut कहा जाता है। यह भारत के अधिकांश भागों में एक जंगली झाड़ी के रूप में मिलता है और इसे बाड़ बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इस पौधे के पत्ते, फूल, जड़ों और छाल का आयुर्वेद में हजारों साल से प्रयोग होता आया है। इसके उपयोग से ब्रोंकाइटिस, कफ, जुखाम, अस्थमा, आदि श्वसन रोगों में बहुत लाभ होता है। इसके सेवन से खांसी और सांस लेने में तकलीफ cough and breathlessness से राहत मिलती है। इसका औषधीय उपयोग मसूढ़े में पीब पड़ने का रोग में pyorrhea और मसूड़ों से रक्तस्राव bleeding gums में राहत देता है।

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By H. Zell (Own work) [GFDL (http://www.gnu.org/copyleft/fdl.html)
अडूसा को मुंह के रोग, कुष्ठ रोग, तपेदिक, रक्त विकार, प्यास, बुखार, उल्टी, श्वेतदाग, पीलिया, ट्यूमर, और सूजाक आदि रोगों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

Classification of Adhatoda vasica

  • Kingdom: Plantae
  • Order: Lamiales
  • Family: Acanthaceae ऐकैनथेसीईए
  • Genus: Justicia
  • Species: J. adhatoda
  • Common name: Adulsa, Vasaka, अडूसा, वसाका, वासा

अडूसा सदाबहार झाड़ी, जिसकी ऊंचाई 2.2-3.5 मीटर होती है। इसके फुल सफ़ेद रंग के होते हैं और पहाड़ी क्षेत्र छोड़ कर यह पूरे भारत में पाया जाता है।

अडूसा खांसी, सांस के रोग, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के रोग में विषेतः लाभकारी है। यह कफ को पिघलाकर कर बाहर निकलता है।

स्थानीय नाम

  • Sanskrit : Vrsha, Atarusa, Vasaka आटरुष, वसाका, वासक, वाजीदन्त,
  • Assamese : Titabahak, Bahak, Vachaka
  • Bengali : Baksa, Vasaka
  • English : Vasaka
  • Gujrati : Aduso, Ardusi, Adulso
  • Hindi : Aduss, Arusa वासा, अडूसा, बिसौता, अरुष
  • Kannada : Adsale, Adusoge, Atarusha, Adsole, Adasale
  • Kashmiri : Vasa
  • Malayalam : Attalataka m, Atalotakam
  • Marathi : Vasa, Adulsa
  • Oriya : Basanga
  • Punjabi : Bhekar, Vansa, Arusa
  • Tamil : Vasambu, Adathodai
  • Telugu : Addasaramu
  • Urdu : Adusa, Basa
  • लैटिन नाम: एधेटोडा वासिका Adhatoda vasica Nees (Fam। Acanthaceae)

Part used: पत्ते, फूल, जड़ और छाल।

रासायनिक संघटन: अरुसा की पत्तियों में वाष्पशील स्नेह, एक क्रिस्टलीय अम्ल, वेसिसिन, वसा, राल, आदि पाये जाते हैं। वेसिसिन की मात्रा पत्तियों में ०.२ से ०.४ प्रतिशत होती है।

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पत्तियों में तीक्ष्ण दुर्गन्ध और पीला रंग होता है।

अडूसा Malabar nut के आयुर्वेदिक गुण

अडूसा वातकारक, आवाज़ के लिए उत्तम, कड़वा, कसैला, हृदय के लिए हितकारी, शीतल, और कफ, पित्त, रक्तविकार, अधिक प्यास, श्वास, खांसी, बुखार, उल्टी, प्रमेह, कोढ़,, तथा क्षय का नाश करता है।

  • रस: तिक्त, काषाय
  • गुण: लघु
  • वीर्य: शीतल
  • विपाक: कटु
  • आयुर्वेदिक दवायें: वसाकासव, वासवालेह

अडूसा के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Malabar nut in Hindi

वासा की पत्तियों से बने काढ़े के सेवन से खांसी, कफ, जुकाम के लक्षण, गले में खराश और अन्य श्वसन रोगों में फ़ायदा होता है। यह सांस नाली में जमा कफ को ढीला करने में मदद करता है। यह फेफड़ों में जमा कफ (बलगम) को बाहर निकालता है। वासा को बहुत से कफ सिरप बनाने में भी प्रयोग किया जाता है।

  • ब्रोंकाइटिस, तपेदिक और फेफड़े के अन्य रोगों में इसके सेवन अच्छे परिणाम देता है।
  • अडूसा को आंतरिक और बाह्य रक्तस्राव में प्रयोग किया जाता है।
  • यह रक्त को भी शुद्ध करता है।
  • अडूसा कफ और पित्त को सही करता है और आवाज को बेहतर बनाता है।

Medicinal Uses of Malabar nut in Hindi

तपेदिक tuberculosis में वासा के पत्तों के रस को शहद और अदरक के रस के साथ, दिन में तीन बार, लेने से लगातार खाँसी से राहत मिलती है।

दवा की तरह वासा के पत्तों को १ टेबल स्पून ताज़ा रस, शहद के साथ मिलाकर पीने से खांसी Cough और रक्त स्राव bleeding में राहत मिलती है।

दस्त और पेचिश diarrhoea and dysentery के उपचार में इसकी पत्तियों का रस 2 से 4 ग्राम की मात्रा दिया जाना चाहिए।

मासिक में अधिक रक्त स्राव Excessive menstruation में दिन में दो बार, अडूसा की पत्तियों का रस 15ml, गुड़ 15 ग्राम के साथ लिया जाना चाहिए।

अर्श piles में अडूसा के काढ़े को पीने से आराम होता है।

घाव पर वासा की पत्तियों की पुल्टिस बना कर लगाने से सूजन से राहत मिलती है और यह जीवाणुरोधी होने के कारण घाव को ठीक करने में भी मदद करता है।

पुल्टिस लगाने से गठिया के लक्षणों से राहत मिलती है।

औषधीय मात्रा: एक वयस्क व्यक्ति को पत्तों का रस १०-२० मिली; सिरप १५-२० मिली और अवलेह १०-२० ग्राम की मात्रा में दिया जाना चाहिए।

Side Effects and Possible Interactions

औषधीय मात्रा में लेने से इसके सेवन से किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं है। गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन न करें।

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