चिरायता Chirata Herb (Swertia Chirata) in Hindi

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चिरायता को संस्कृत में किराततिक्त, किरात, कटूतिक्त, किरातक, काण्डतिक्त, अनार्यतिक्त, भूनिम्ब, रामसेनक आदि नामों से जाना जाता है। चिरायते को बंगाली में चीरता, चीरता, नेपाली नीम, मराठी में किराइत, गुजराती में कटीयातुं, और इंग्लिश में चिरेता कहते हैं। लैटिन भाषा में इसका नाम स्वर्शिया चिरेटा है।

chirayata
By Satheesan.vn (Own work)[ CC-BY-SA-3.0 or GFDL], via Wikimedia Commons
यह स्वाद में कटु और तिक्त होता है। नेपाल में पाया जाने वाला चिरायता अर्धतिक्त कहलाता है क्योंकि इसकी तिक्ता कुछ कम होती है।

चिरायता को बहुत पुराने समय से आयुर्वेद में दवाई की तरह प्रयोग किया जाता रहा है। चरक और सुश्रुत में पूरे पौधे का पेस्ट / काढ़ा, रक्त साफ़ करने के लिए, विष के उपचार में, पुराने चमड़ी के रोगों, सूजन, बुखार, खांसी, आंतरिक रक्तस्राव, और पेशाब के रोगों में प्रयोग किया। इसका सेवन माँ के दूध से गंदगी को दूर करता है। बुखार में इसे धनिया की पत्तियों के साथ लिया जाता है। पुराने बुखार, खून की कमी, जोड़ों की दिक्कत, फोड़े, फुंसी, चक्खते, यकृत रोगों, अपच, भूख न लगना, मलेरिया, आदि में इसका प्रयोग रोग को नष्ट करता है।

सामान्य जानकारी

चिरायता एक वर्षीया पौधा है तथा इसके पौधे 2-3 फुट तक ऊँचे हो सकते हैं। इसके पत्ते भालाकर, लम्बे और छोटे होते है। नीचे की पत्तियां बड़ी और उपरी पत्तियां छोटी होती हैं। फल सफ़ेद रंग के होते हैं। औषधीय प्रयोग के लिए पूरे पौधे का प्रयोग किया जाता है।

  • वानस्पतिक नाम: स्वर्शिया चिरेटा Swertia chirata
  • कुल (Family): जेंटीऐनेसिऐइ
  • औषधीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल भाग: पूरा पौधा
  • पौधे का प्रकार: गुल्म / क्षुप
  • वितरण: प्रायः पर्वतीय क्षेत्रों में, हिमालय, दक्षिण और कोंकण व नेपाल में
  • पर्यावास: शीतोष्ण हिमालय, कश्मीर से भूटान, 1200-3000 मीटर के बीच ऊंचाई पर और मेघालय में खासी हिल्स

वैज्ञानिक वर्गीकरण

  • किंगडम Kingdom: प्लांटी: Plantae – Plants
  • सबकिंगडम Subkingdom: ट्रेकियोबाईओन्टा Tracheobionta: संवहनी पौधे
  • सुपरडिवीज़न Superdivision: स्परमेटोफाईटा: बीज वाले पौधे
  • डिवीज़न Division: मग्नोलिओफाईटा – Flowering plants फूल वाले पौधे
  • क्लास Class: मग्नोलिओप्सीडा – द्विबीजपत्री
  • सबक्लास Subclass: एस्टेरिडए Asteridae
  • आर्डर Order: जेंटीनालेस Gentianales
  • परिवार Family: जेंटीऐनेसिऐइ Gentianaceae– Gentian family किरात
  • जीनस Genus: स्वर्शिया Swertia L। – felwort
  • प्रजाति Species: स्वर्शिया चिरेटा Swertia chirata। N।O। Gentianaceae

स्थानीय नाम / Synonyms

संस्कृत: किराततिक्त, किरात, कटूतिक्त, किरातक, काण्डतिक्त, अनार्यतिक्त, भूनिम्ब, रामसेनक

  • इंग्लिश : Brown Chirata, Chirayta, Griseb
  • असमिया: Chirta
  • बंगाली: Chirata
  • अंग्रेज़ी: Chireta
  • गुजराती: Kariyatu, Kariyatun
  • हिन्दी: Chirayata
  • कन्नड़: Nalebevu, Chirata Kaddi, Chirayat
  • कश्मीरी: खो, Chiraita
  • मलयालम: Nelaveppu, Kirayathu, Nilamakanjiram
  • मराठी: Kiraita, Kaduchiraita
  • उड़िया: Chireita
  • पंजाबी: चिरायता, Chiraita
  • तमिल: Nilavembu
  • तेलुगु: Nelavemu
  • उर्दू: Chiraita

चिरायते के संघटक

जेनथॉन्स, जेनथॉन्स ग्लाइकोसाइड and मैंगिफेरिने (फ्लैवोनॉइड) Xanthones, xanthone glycoside and mangiferine (Flavonoid)

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इसमें दो बहुत ही कडवे पदार्थ चिरेटिन और ओफेलिक एसिड chiratin and ophelic acid पाए जाते हैं। चिरायता में टैनिन, वैक्स, रेसिं और चीनी भी पायी जाती है।

औषधीय मात्रा:

1-3 ग्राम पौधे का पाउडर, 20-30 ग्राम काढ़ा बनाने के लिए

आयुर्वेदिक गुण और कर्म

आयुर्वेद में चिरायता को मलनिःसारक, शीतल, कडवा, हल्का, रूखा, माना गया है। इसे बुखार, खांसी, कफ, पित्त, खून के विकारों, चमड़ी के रोगों, जलन, खांसी, सूजन, अधिक प्यास लग्न, कुष्ठ, घाव और कृमि रोगों में प्रयोग किया जाता है।

रस (taste on tongue): तिक्त

गुण (Pharmacological Action): लघु, रुक्ष

वीर्य (Potency): शीत

विपाक (transformed state after digestion): कटु

कर्म:

कफहर, पित्तहर, रक्तशोधक, व्रणशोधक, ज्वरहर, तृष्णाहर

यह शक्तिवर्धन के लिए के टॉनिक की तरह प्रयोग किया जता है। इसका सेवन ज्वरहर है। यह रक्तशोधक है और बहुत सी खून साफ़ करने वाई दवाओं का एक प्रमुख घटक है।

चिरायते के औषधीय प्रयोग

  1. मलेरिया के बुखार में तथा अन्य बुखारों में इसका काढ़ा पीने से राहत मिलती है।
  2. चिरायता पेट और लीवर के लिए बहुत अच्छा है। यह इनकी कार्य शक्ति को बढ़ाता है। अपच में इसका सेवन लाभदायक है।
  3. यह एक टॉनिक है और इसका सेवन शरीर को ताकत देता है।
  4. खून के विकारों में इसका प्रयोग खून को साफ़ करता है।
  5. इसको आँख में लगाने, आँखों की रौशनी बढती है।
  6. काढ़े या पौधे के अर्क को एक टॉनिक, भूख और ज्वरनाशक के रूप में लिया जाता है।
  7. यह कृमिनाशक, विरेचक है और त्वचा रोगों के लिए उपयोगी है।
  8. यह लीवर / यकृत रोगों, हैजा आदि में टॉनिक के रूप में लिया जाता है।
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