सुहागा टंकण Borax in Hindi

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टंकण, टंकन, टैंक, टंगन, द्रावक, टंकणक्षार, रंगक्षार, रंग, रंगद, सौभाग्य, धातुद्रावक, क्षारराज आदि सभी सुहागे या बोरेक्स के नाम हैं। यह क्योंकि धातुओं के शोधन में प्रयोग होता है इसे स्वर्णशोधन, ,स्वर्णदात्रक, लोहशोधन, लोहदात्री भी कहा जाता है।

सुहागा नेपाल में बहुत मात्रा में पाया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से क्रिस्टल के रूप में मिलता है।

सुहागा रंग में सफ़ेद, गंधरहित और रवेदार होता है। स्वाद में यह खारा होता है। सुहागे के बहुत से उपयोग हैं। यह धातुओं की मेटलर्जी में फ्लक्स flux के रूप में प्रयोग होता है। फ्लक्स का काम धातुओं को पिघलाने में मदद करने और उनके अन्दर मौजूद अशुद्धियों को स्लैग बनाकर निकालने का होता है। इसे कीटनाशक की तरह और कोक्रोचों को दूर रखने के लिए प्रयोग किया जाता है।

आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, एलोपैथी, होमियोपैथी चिकित्सा पद्यति में इसे दवाई की तरह भी प्रयोग किया जाता है। सुहागे में मूत्रल, संकोचक, एंटासिड, और एंटीसेप्टिक गुण हैं।

आयुर्वेद में सुहागे को बहुत प्राचीन समय से दवा की तरह आंतरिक और बाह्य रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे स्वभाव से गर्म माना गया है। यह पित्तवर्धक और कफनाशक है। सुहागा अग्निवर्धक, विष, ज्वर, गुल्म, आम, शूल, और कासनाशक है। यह भेदक, कामोद्दीपक, पित्तजनक है। यह वमन, वातरक्त, और खांसी को दूर करने वाला है।

आयुर्वेदिक दवाओं, जैसे की रजःप्रवर्तिनी वटी, लक्ष्मीविलास रस, में सुहागा भी एक घटक है। गर्भनिरोधक की तरह पिप्पली, विडंग और शुद्ध टंकण को बराबर मात्रा में मिलाकर दूध के साथ दिया जाता था। टंकण भस्म को वत्सनाभ के हानिप्रद प्रभावों antidote of Vatsanabha को दूर करने के लिए दिया जाता है।

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एलोपैथी में बोरेक्स का प्रयोग आँख के रोगों में होता है। गले में जलन, के लिए बोरेक्स को शहद के साथ प्रयोग करते हैं।

होमियोपैथी में, स्त्रियों के रोगों, मुंह में हुए अल्सर, छाले, लिकोरिया, वूपिंग कफ, आवाज़ का बैठ जाना, आदि के लिए बोरेक्स का प्रयोग किया जाता है।

यूनानी दवा, जैस की हब्ब-ऐ-नौशादारी HABB-E-KABID NAUSHADARI, हब्ब-ए-टंकर HABB-E-TANKAR, आदि में भी सुहागे को डाला जाता है। सुहागे की खील, नौशादर, फिटकरी, और कलमी शोरे के बारीक चूर्ण को मिलाकर पानी के साथ लेने से पीलिया / जांडिस में लाभ होता है।

सुहागा क्या है?

सुहागा, सोडियम टेट्राबोरेट, या डाईसोडियम टेट्राबोरेट है। यह एक खनिज है और बोरिक एसिड का लवण है।

  • केमिकल नाम Chemical name: Sodium Tetraborate, Na2B4O7.10H2O (Contains not less than 99.0% and not more than the equivalent of 103.0 % , Na2B4O7.10H2O)
  • विवरण Description: Transparent, colorless crystals, or a white, crystalline powder, odorless, taste saline and alkaline. Effloresces in dry air, and on ignition, loses all its water of crystallization.
  • घुलनशीलता Solubility: Soluble in water, practically insoluble in alcohol
  • कठोरता Hardness : 2 to 2।5
  • स्पेसिफिक ग्रेविटी Sp. Gr.: 1।65 to 1।7
  • स्वाद Taste: Sweetish alkaline

स्थानीय नाम

  1. Sanskrit: Tankana, Tunkana, Rasashodhan
  2. Hindi: Suhagaa, Tinkal, Tincal
  3. English: Tincal, Borax, Sodium biborate, Biborate of Soda Borax, Biborate of Sodium
  4. Bengali: Sohaga
  5. Gujarati: Tankana Khara, Khadiyo Khara
  6. Kannada: Biligāra, Belgar
  7. Malayalam: Pongaaram
  8. Marathi: Tankana Khara
  9. Punjabi: Sohaga
  10. Tamil: Venkaram
  11. Telugu: Veligaram
  12. Urdu: Tankar, Suhaga
  13. Arabic: Buraekes-saghah
  14. Persian: Tinkar-tankar

सुहागे की खील (Suhage Ki Kheel) Tankar biryani

सुहागे को पीस कर उसका चूर्ण बनाया जाता है। इसको एक साफ़ कढ़ाही में डाल कर चम्मच से चलाया जाता है। जब सुहागे का जलीय भाग dehydrated borax नष्ट हो जाता है तब यह खील की तरह फूल जाता है। यही सुहागे की खील या शुद्ध टंकण है। Pieces of borax are to be heated on frying pan on low flame to get white fluffy masses। इसे पीस लेते हैं और छन्नी से छान कर रख लेते हैं।

आंतरिक प्रयोग के लिए इस तरह से भुने/फुलाए/निर्जलीय/डीहाइड्रेटेड सुहागे का प्रयोग होता है।

आयुर्वेदिक गुण और कर्म

सुहागा स्वाद में कटु, गुण में रूखा करने वाला, उष्ण, भारी और तेज है। स्वभाव से यह गर्म है और कटु विपाक है।

यह कटु रस औषधि है। इसमें गर्मी के गुण होते हैं। गर्म गुण के कारण यह शरीर में पित्त बढ़ाता है, कफ को पतला करता है। यह पाचन और अवशोषण को सही करता है। इसमें खून साफ़ करने और त्वचा रोगों में लाभ करने के भी गुण हैं। कटु रस गर्म, हल्का, पसीना लाना वाला, कमजोरी लाने वाला, और प्यास बढ़ाने वाला होता है। यह रस कफ रोगों में बहुत लाभप्रद होता है। गले के रोगों, शीतपित्त, अस्लक / आमविकार, शोथ रोग इसके सेवन से नष्ट होते हैं। यह क्लेद/सड़न, मेद, वसा, चर्बी, मल, मूत्र को सुखाता है। यह अतिसारनाशक है। इसका अधिक सेवन शुक्र और बल को क्षीण करता है, बेहोशी लाता है, सिराओं में सिकुडन करता है, कमर-पीठ में दर्द करता है। पित्त के असंतुलन होने पर कटु रस पदार्थों को सेवन नहीं करना चाहिए।

यह उष्ण वीर्य है। वीर्य का अर्थ होता है, वह शक्ति जिससे द्रव्य काम करता है। उष्ण वीर्य औषधि वात, और कफ दोषों का शमन करती है। यह शरीर में प्यास, पसीना, जलन, आदि करती हैं। इनके सेवन से भोजन जल्दी पचता (आशुपाकिता) है।

विपाक का अर्थ है जठराग्नि के संयोग से पाचन के समय उत्पन्न रस। इस प्रकार पदार्थ के पाचन के बाद जो रस बना वह पदार्थ का विपाक है। शरीर के पाचक रस जब पदार्थ से मिलते हैं तो उसमें कई परिवर्तन आते है और पूरी पची अवस्था में जब द्रव्य का सार और मल अलग हो जाते है, और जो रस बनता है, वही रस उसका विपाक है। कटु विपाक, द्रव्य आमतौर पर वातवर्धक, मल-मूत्र को बांधने वाले होते हैं। यह शुक्रनाशक माने जाते हैं। और शरीर में गर्मी या पित्त को बढ़ाते है।

  • रस (taste on tongue): कटु
  • गुण (Pharmacological Action): रुक्ष, उष्ण, तीक्ष्ण, सारक
  • वीर्य (Potency): उष्ण
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु

सुहागे को कास/कफ, श्वास/अस्थमा, वात रोग, विष, अफारा और व्रण/घाव आदि में प्रयोग किया जाता है।

औषधीय मात्रा: 125 – 250 mg

सुहागे के फायदे Benefits of Suhaga / Borax

  • सुहागा या टंकण रस में कटु, गुण में उष्ण, तीक्ष्ण, रूक्ष और सारक है। यह अग्नि को उत्पन्न करता है। यह कफनाशक है व पित्त वर्धक है।
  • यह कफ को निकालता है।
  • यह कास और श्वास रोगों में बहुत लाभप्रद है।
  • यह वातरोगों को नष्ट करता है।
  • यह पाचक अग्नि को बढ़ाता है।
  • यह यकृत की क्रिया को तेज़ करता है।
  • यह गैस/अफारा को दूर करता है।
  • यह गर्भाशय में संकुचन पैदा करता है जिससे मासिक खुल कर आता है।
  • यह मूढ़ गर्भ को निकालने के काम आता है।
  • यह घावों पर बाहरी रूप से लगाया जाता है।
  • यह पित्त को उत्तेजित करता है।

सुहागे के चिकित्सीय उपयोग Medicinal Uses of Borax

  1. कफ को पतला expectorant करने के लिए, टंकण को त्रिकटु कायफल, वासा और जवाखार के साथ प्रयोग किया जाता है।
  2. जुखाम coryza में, सुहागे को तवे पर गर्म करके पीस लेते हैं। इस पाउडर की चुटकी भर मात्रा को पानी में घोलकर पीते हैं। ऐसा दिन में चार बार करते हैं।
  3. विरेचन laxative के लिए, इसे त्रिकटु और जमालगोटा के साथ प्रयोग करते हैं।
  4. पायरिया, मसूड़ों के घाव, सूजन, gum problems आदि में इसे बोलचूर्ण के साथ दांतों पर मलते हैं।
  5. बहुत अधिक गैस बनने पर gas, फुलाए टंकण के चुटकी भर चूर्ण को त्रिकटु के साथ मिला कर शहद के साथ चाटा जाता है।
  6. पाचन की कमजोरी, अजीर्ण में, indigestion सुहागे की खील का चूर्ण चुटकी भर की मात्रा में लेते हैं।
  7. बढ़ी हुई तिल्ली में enlarged spleen, भुना हुआ सुहागा (30 ग्राम) + राई (100 ग्राम) के बारीक चूर्ण को मिलाकर छन्नी से छानकर अच्छे से मिला कर रख लेते हैं। इसे आधे चम्मच की मात्रा में फंकी की तरह दिन में दो बार दो महीने तक लेने से तिल्ली सामान्य हो जाती है। यह प्रयोग भूख बढ़ाता है और शरीर को बल देने सहयोग करता है।
  8. मजबूत दांतों के लिए, फुलाए हुए सुहागे के चूर्ण को मिश्री के साथ मिलकर दांतों पर मलते हैं।
  9. गले के बैठ जाने, आवाज़ बंद होने पर hoarseness of voice सुहागे के चुटकी भर चूर्ण को मुंह में रख कर acts magically in restoring the voice चूसा जाता है।
  10. चोट से खून बहने पर, bleeding टंकण के चूर्ण को उस पर छिडकने से खून का बहना रुक जाता है।
  11. मुखपाक stomatitis में, सुहागे की खील का शहद के साथ मिलाकर मुख के अन्दर लेप किया जाता है।
  12. योनी vagina में यदि घाव, फोड़े, फुंसी आदि हो तो इसके पानी से धोने से आराम होता है।
  13. पसीने की बदबू, अधिक पसीना आने में, स्नान के आखिर में सुहागे को पानी में घोल कर बाहरी रूप से प्रयोग करते हैं।
  14. वार्ट और कॉर्न पर सुहागे को पपीते के साथ लगाते हैं।

सावधानी

  1. इसे गर्भावस्था में प्रयोग न करें।
  2. इसके सेवन से मासिक स्राव ज्यादा हो सकता है।
  3. इसे 500 mg से ज्यादा मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
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