नीम Neem tree Information and Uses in Hindi
गूलर Information and Medicinal Uses of Gular
सहजन की पत्तियों(Moringa Leaves) के पाउडर के लाभ
अश्वगंधा Ashwagandha detail, benefits and uses in Hindi

अखरोट खाने के फायदे Benefits and Medicinal Uses of Walnut in Hindi

Walnut benefits

अखरोट को आयुर्वेद में अक्षोट, अक्षोत, शैलभावपीलू, और कर्पराल कहते हैं। अखरोट की न केवल गिरी, बल्कि पत्ते, जड, टहनी सभी चिकित्सीय दृष्टि से उपयोगी हैं।

सारिवादि वटी Sarivadi Vati Detail and Uses in Hindi

इसे कान का बहाना, कान में आवाजें आना, ठीक से सुनाई न देना, कान में दर्द, आदि में प्रयोग किया जाता है। सारिवादि वटी को ब्लीडिंग डिसऑर्डर, प्रमेह, स्त्री रोगों और हृदय रोगों में भी प्रयोग किया जाता है।

पुराना घृत Purana Ghrita Detail and Uses in Hindi

Clarified butter

आयुर्वेद में एक वर्ष या उसे अधिक रखा घी ‘पुराना घृत’ कहलाता है। पुराना घृत, मिर्गी, नशे, बेहोशी, मलेरिया, विषम ज्वर, आँखों के रोग, मस्तिष्क के रोग, जननागों के रोगों को दूर करने वाला है।

कुष्माण्ड रसायन Kushmanda Rasayana Detail and Uses in Hindi

कुष्माण्ड रसायन दवा एक रसायन या टॉनिक है जिसके सेवन से रोग दूर होते हैं और आयु की वृद्धि होती है। कूष्माण्ड रसायन के सेवन से शरीर में बल, वीर्य, तेज की वृद्धि होती है।

गंधक Gandhak Medicinal Uses and Details

गंधक में एंटी-बेक्टेरियल, एंटी-फंगस, तथा अन्य पैरासिटिक जीवों को मारने के गुण मौजूद है। यह त्वचा रोगों में विशेष रूप से उपयोगी है। आजकल लोशन, क्रीम, साबुन आदि बनाने के लिए भी इसका प्रयोग एक घटक की तरह होता है।

मुलेठी क्वाथ Mulethi Kwath Detail and Uses in Hindi

mulethi medicinal uses

मुलेठी क्वाथ, लिकोरिस या मुलेठी से बने काढ़े को कहते हैं। मुलेठी का काढ़ा कफजन्य रोगों, गले के संक्रमण, अम्लता, अपच और अन्य पेट संबंधी बीमारियों में लाभप्रद है।

मुलेठी के साइड-इफ़ेक्ट Side-effects of Liquorice in Hindi

mulethi medicinal uses

मुलठी को बहुत कम मात्रा में ज्यादा दिन तक लिया जाता है। यदि इसे ज्यादा मात्रा में लिया जा रहा है तो कम दिन तक लिया जाता है। आइये जाने इसके साइड इफेक्ट्स और किन किन रोगों में नहीं इस्तेमाल के बारे में।

मुलेठी Liquorice Medicinal Uses in Hindi

mulethi medicinal uses

मुलेठी जो दवा की तरह प्रयोग की जाती है वह इसी कोमलकांडीय पौधे की जड़ होती है। ३-४ साल पुराने पौधों की जड़े ही दवा के रूप में प्रयोग की जाती है।