नीम Neem tree Information and Uses in Hindi
गूलर Information and Medicinal Uses of Gular
सहजन की पत्तियों(Moringa Leaves) के पाउडर के लाभ
अश्वगंधा Ashwagandha detail, benefits and uses in Hindi

शिलाजीत Shilajit Details in Hindi

shilajit

शिलाजीत को हजारों साल से लगभग हर बीमारी के उपचार में प्रयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेद में यह कहा गया है की कोई भी ऐसा साध्य रोग नहीं है जो की शिलाजतु के प्रयोग से नियंत्रित या ठीक नहीं किया जा सकता।

शिलाजित्वादि लौह Shilajitwadi Lauh Detail and Uses in Hindi

इसके सेवन से खून की कमी, सभी प्रकार के राजयक्ष्मा tuberculosis, रक्त क्षय blood loss, पुराना बुखार, ब्लीडिंग डिसऑर्डर, प्रमेह आदि दूर होते हैं।

प्रभाकर वटी Prabhakar Vati Detail and Uses in Hindi

इसके अतिरिक्त इसे फेफड़ों की कमजोरी, कफ, खून की कमी, लीवर के रोगों (पीलिया, हलीमक, सूजन), आदि में भी दिया जाता है। यह समस्त हृदय रोगों और फेफड़ों के रोगों में लाभप्रद है।

यकृदरि लौह Yakridari Lauh Detail and Uses in Hindi

यकृदरि लौह, लीवर और प्लीहा के रोगों को दूर करता है और पाचन शक्ति को सही करता है। लीवर-प्लीहा में रोग होने पर, या किसी कारणवश उनके बढ़ जाने से खाने का पाचन सही से नहीं हो पाता।

विषम ज्वरान्तक लौह (पुटपक्व) Visham Jwarantak Lauha (Putapakwa) Detail and Uses in Hindi

विषम ज्वरान्तक लौह, आयुर्वेदिक दवा है जिसे किसी भी कारण से होने वाले बुखार के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

लौह भस्म Lauha Bhasma Detail and Uses in Hindi

आयुर्वेद में लौह कल्प बनाये जाते हैं। लौह कल्प वह दवाएं हैं जिनमे लौह भस्म मुख्य घटक है। लौह के अतिरिक्त इन दवाओं में हर्बल घटक जैसे की आंवला, शहद आदि भी होते हैं। लौह कल्प के नाम में ‘लौह’ शब्द का प्रयोग होता है। लौह कल्प को क्रोनिक बिमारियों के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है।

पिप्पल्यादि लौह Pippalyadi Lauha Detail and Uses in Hindi

दवा को भैषज्य रत्नावली के हिक्काश्वासरोगाधिकार से लिया गया है। इसका प्रयोग खांसी, कफ, अस्थमा, हिचकी/हिक्का रोग, वमन, आदि को दूर करने के लिए होता है। यह छाती में जमा कफ को यह निकालने में मदद करती है। सूखी खांसी में भी इसका प्रयोग अच्छे परिणाम देता है।

नीम Neem tree Information and Uses in Hindi

Neem

अथर्ववेद में नीम्बा शब्द का प्रयोग किया गया है जिसकी उत्पत्ति ‘निम्बाती स्वस्थ्यमघाती’ अर्थात ‘अच्छा स्वाथ्य बने रखना’, उक्ति से हुई है। क्योंकि नीम अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहयोगी है तथा रोग निवारक है इसलिए इसे निम्ब नाम मिला। नीम को सर्वरोग निवारिण (सभी बिमारियों की दवा) भी कहा जाता है क्योकि यह एक नहीं अनेक रोगों की प्रभावशाली दवा है।